राज्य कृषि समाचार (State News)

20 साल की पारंपरिक खेती के बाद बदला तरीका, समन्वित खेती से तिजाराम की आय ₹2 लाख पार; किसानों के लिए बने प्रेरणा

18 अगस्त 2026, रायपुर: 20 साल की पारंपरिक खेती के बाद बदला तरीका, समन्वित खेती से तिजाराम की आय ₹2 लाख पार; किसानों के लिए बने प्रेरणा – छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर के ग्राम बड़ेझमरी के किसान तिजाराम पिता सुखराम ने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों और समन्वित खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की मिसाल पेश की है। करीब 20 वर्षों से खेती कर रहे तिजाराम अब फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन, बत्तख पालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को भी खेती से जोड़ रहे हैं।

2 हेक्टेयर जमीन पर अपनाया समन्वित खेती मॉडल

तिजाराम के पास करीब 2 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से धान, मक्का, उड़द, चना और अरहर जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। बाद में उन्होंने केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय उद्यानिकी फसलों के साथ पशुपालन और अन्य सहायक गतिविधियों को खेती का हिस्सा बनाया। समन्वित खेती के तहत उन्होंने मुर्गीपालन, बत्तख पालन और तालाब में मछलीपालन को फसल उत्पादन से जोड़ा। इससे खेत और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होने लगा और उनके पास आय के कई स्रोत तैयार हुए।

‘आत्मा’ योजना से मिला मार्गदर्शन

तिजाराम की खेती में बदलाव की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई। इस दौरान वे कृषि विभाग के अधिकारियों और ‘आत्मा’ योजना के मैदानी अमले के संपर्क में आए। विभाग की ओर से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया। कृषि विभाग ने उन्हें अरहर उत्पादन के लिए उन्नत किस्म के निःशुल्क बीज भी उपलब्ध कराए। इसके बाद उन्होंने अरहर की खेती के साथ मुर्गीपालन, बत्तख पालन और मछलीपालन को एक-दूसरे से जोड़कर समन्वित कृषि मॉडल विकसित किया।

सालाना आय ₹2 लाख के पार

तिजाराम बताते हैं कि खेती के साथ अलग-अलग कृषि गतिविधियों को जोड़ने से उनकी आमदनी में लगातार सुधार हुआ है। समन्वित खेती से अब उनकी वार्षिक आय ₹2 लाख से अधिक हो गई है। उनका कहना है कि पहले खेती में आमदनी मुख्य रूप से फसलों पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब पशुपालन, मुर्गी-बत्तख पालन और मछलीपालन से भी आय के रास्ते खुले हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और खेती को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

तिजाराम की सफलता का असर उनके गांव तक ही सीमित नहीं है। ग्राम बड़ेझमरी और आसपास के किसान भी उनकी खेती के तरीके को देखकर समन्वित कृषि और सहायक गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। तिजाराम की कहानी बताती है कि सीमित कृषि भूमि में भी फसल विविधीकरण, पशुपालन, मुर्गी-बत्तख पालन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के साथ समन्वित खेती किसानों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture