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राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि वैज्ञानिक की सलाह: रबी फसल कटाई के बाद खेत तैयार कर शीघ्र ग्रीष्मकालीन मक्का, भिंडी व लोबिया बोएं

19 मार्च 2026, भोपाल: कृषि वैज्ञानिक की सलाह: रबी फसल कटाई के बाद खेत तैयार कर शीघ्र ग्रीष्मकालीन मक्का, भिंडी व लोबिया बोएं – कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि रबी फसलों जैसे गेहूं, चना, मसूर और सरसों की कटाई के तुरंत बाद खेत की तैयारी कर ग्रीष्मकालीन मक्का, भिंडी और लोबिया की बुवाई शीघ्र पूरी करें। वैज्ञानिकों के अनुसार खेत की मिट्टी उपयुक्त रूप से भुरभुरी व महीन होने के बाद ही बीज बोना चाहिए। बलुई दोमट या दोमट मिट्टी, जिसका पीएच 6 से 7 के बीच हो, इन फसलों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

मक्का की बुवाई और पोषण

ग्रीष्मकालीन मक्का के लिए उन्नत किस्में जैसे पी.एम.एच.-7, पी.एम.एच.-8, पी.एम.एच.-10, कंचन, गौरव, विवेक मक्का और हाइब्रिड-27 का चयन करें। बीज दर सामान्य मक्का के लिए 18–20 किग्रा और संकर मक्का के लिए 12–15 किग्रा प्रति हेक्टेयर रखें। कतार से कतार की दूरी 60 सेमी और पौध से पौध की दूरी 30 सेमी होनी चाहिए। अच्छे उत्पादन के लिए नाइट्रोजन, स्फुर और पोटाश की मात्रा 120:60:40 किग्रा प्रति हेक्टेयर के अनुपात में दें, जिसमें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष आधी दो हिस्सों में दें।

भिंडी और लोबिया की बुवाई

भिंडी के लिए उन्नत किस्में पूसा सावनी, पूसा मखमली, परभनी क्रांति और अर्का अनामिका हैं। बीज दर 20–22 किग्रा प्रति हेक्टेयर, कतार से कतार 45 सेमी और पौध से पौध 20 सेमी रखें। नाइट्रोजन-स्फुर-पोटाश का अनुपात 40:50:60 किग्रा प्रति हेक्टेयर दें।

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लोबिया के लिए उन्नत किस्में पूसा कोमल, पूसा सुकोमल, काशी गौरी और काशी कंचन हैं। बीज दर 18–20 किग्रा, कतार से कतार दूरी 45–60 सेमी और पौध से पौध 10 सेमी होनी चाहिए। नाइट्रोजन-स्फुर-पोटाश की मात्रा 20:60:50 किग्रा प्रति हेक्टेयर दी जाए।

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रबी फसलों की कटाई

चने, मसूर और सरसों जैसी रबी फसलें कटाई के लिए तभी तैयार होती हैं जब फलियां पूरी तरह पक जाएं और पौधे पीले पड़ने लगें। मसूर की फसल में 70–80 प्रतिशत फलियां सूखने पर कटाई करनी चाहिए। सरसों की फसल में पत्ते झड़ने और 75 प्रतिशत फलियों के सुनहरा होने पर ही कटाई करें।

इस तरह किसानों को सही समय पर खेत की तैयारी और उपयुक्त बीज एवं पोषण देने से ग्रीष्मकालीन फसलों की पैदावार बढ़ेगी और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। कृषि वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा कि किसानों को खेत की मिट्टी, बीज उपचार और उन्नत किस्मों पर ध्यान देना चाहिए, जिससे फसलों का उत्पादन अधिक और गुणवत्ता बेहतर हो।

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