राज्य कृषि समाचार (State News)

शेडनेट हाउस ने बदली झाबुआ के किसान की तकदीर, दो फसलों में ₹3.49 लाख से अधिक का हुआ शुद्ध लाभ; जानिए कैसे

22 दिसंबर 2025, भोपाल: शेडनेट हाउस ने बदली झाबुआ के किसान की तकदीर, दो फसलों में ₹3.49 लाख से अधिक का हुआ शुद्ध लाभ; जानिए कैसे – मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के विकासखंड रामा अंतर्गत ग्राम कोकावद के अनुसूचित जनजाति कृषक प्रभु खुमसिह भूरिया ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि शासकीय योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो खेती न केवल आजीविका का साधन बल्कि समृद्धि का मार्ग भी बन सकती है। उन्होंने अपने पिताजी खूम सिंह भूरिया के नाम से एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत शेडनेट हाउस घटक का लाभ लेकर अपनी खेती को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं अत्यंत लाभकारी बनाया है।वर्ष 2024–25 में शासन द्वारा कृषक को 2000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में शेडनेट हाउस की स्थापना हेतु ₹ 7,10,000 की अनुदान राशि प्रदान की गई। इस सहयोग ने कृषक के जीवन और खेती की दिशा ही बदल दी। योजना से पूर्व वे सोयाबीन एवं गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती पर निर्भर थे, जिसमें मौसम पर अत्यधिक निर्भरता, उत्पादन में अनिश्चितता एवं सीमित आमदनी जैसी समस्याएँ बनी रहती थीं।

योजना से पहले सोयाबीन की खेती से उन्हें लगभग 3 क्विंटल उपज प्राप्त होती थी, जिससे केवल ₹ 10,500 की कुल आय और लगभग ₹ 5,500 की शुद्ध आय हो पाती थी। वहीं गेहूं की खेती से 8 क्विंटल उत्पादन पर ₹ 17,600 की कुल आय तथा मात्र ₹ 11,100 की शुद्ध आय प्राप्त होती थी। इस आय से परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन हो रहा था।

शेडनेट हाउस की स्थापना के पश्चात कृषक ने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए खीरा फसल की उन्नत एवं नियंत्रित वातावरण में खेती प्रारंभ की। शेडनेट तकनीक के माध्यम से फसल को मौसम की मार से सुरक्षा मिली, रोग एवं कीट प्रकोप में कमी आई तथा गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

 इसका परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहा। पहली फसल में 155 क्विंटल खीरे का उत्पादन हुआ, जिससे ₹ 2,32,500 की कुल आय एवं ₹ 1,57,000 की शुद्ध आय अर्जित हुई। वहीं दूसरी फसल में 110 क्विंटल उपज से ₹ 2,75,000 की कुल आय एवं ₹ 1,92,800 की शुद्ध आय प्राप्त हुई। कम समय में प्राप्त यह आय पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक थी।

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इस प्रकार एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत शेडनेट हाउस तकनीक अपनाकर कृषक की आय में उल्लेखनीय और स्थायी वृद्धि हुई है। यह सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक, शासकीय सहयोग और कृषक की मेहनत मिलकर खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकते हैं।

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 खुमसिंह भूरिया की यह प्रेरक सफलता कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों को उन्नत बागवानी एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए मार्गदर्शन एवं उत्साह प्रदान करती है।

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