उन्नत तकनीक का कमाल: 2 किलो तिल के बीज से किसान ने हासिल किया 50 किलो उत्पादन; किसान सतीश ने पेश की मिसाल
24 जून 2026, भोपाल: उन्नत तकनीक का कमाल: 2 किलो तिल के बीज से किसान ने हासिल किया 50 किलो उत्पादन; किसान सतीश ने पेश की मिसाल – खेती में नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। इसका ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर विकासखंड के ग्राम कोस्ते के किसान सतीश पांचे ने प्रस्तुत किया है। कृषि विभाग से प्राप्त मात्र 2 किलोग्राम ग्रीष्मकालीन तिल के बीज से उन्होंने 50 किलोग्राम तिल का उत्पादन प्राप्त कर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन से मिली सफलता
सतीश पांचे पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई कृषि तकनीकों को अपनाने में हमेशा रुचि रखते हैं। ग्रीष्मकालीन तिल उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने उन्हें उन्नत किस्म के 2 किलोग्राम तिल के बीज उपलब्ध कराए थे। विभागीय अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों का पालन करते हुए उन्होंने अपने खेत में तिल की बुवाई की।
समय पर सिंचाई, उचित पोषण प्रबंधन और फसल की नियमित निगरानी के कारण उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। फसल तैयार होने पर उन्होंने 2 किलोग्राम बीज से 50 किलोग्राम तिल का उत्पादन हासिल किया।
संदेह से शुरू हुई सफलता की कहानी
सतीश पांचे बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें ग्रीष्मकालीन तिल की खेती को लेकर संदेह था। क्षेत्र के अधिकांश किसान खरीफ सीजन की पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर रहते हैं, इसलिए वैकल्पिक फसल अपनाना उनके लिए नया अनुभव था। हालांकि कृषि विभाग के प्रोत्साहन और विशेषज्ञों की सलाह पर भरोसा करते हुए उन्होंने तिल की खेती करने का निर्णय लिया।
उनका यह निर्णय सफल साबित हुआ और उत्पादन ने उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक परिणाम दिए।
कम पानी में अधिक लाभ की फसल
किसान सतीश पांचे का कहना है कि ग्रीष्मकालीन तिल कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है और इसे अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है, जो सीमित जल संसाधनों के बीच अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि तिल की खेती से खेत का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को मुख्य फसल के अलावा अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिलता है।
किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह
सतीश पांचे ने अन्य किसानों से भी कृषि विभाग द्वारा सुझाई जा रही वैकल्पिक और लाभकारी फसलों को अपनाने की अपील की है। उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाएं तो उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि की जा सकती है।
आय बढ़ाने में सहायक है ग्रीष्मकालीन तिल
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ग्रीष्मकालीन तिल किसानों के लिए एक लाभकारी फसल साबित हो रही है। यह न केवल कम समय में तैयार हो जाती है, बल्कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करती है। इसके अलावा तिल की बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।
विभाग द्वारा किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान ऐसी लाभकारी फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
ग्राम कोस्ते के किसान सतीश पांचे की सफलता इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज और विभागीय मार्गदर्शन के समन्वय से सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि अब आसपास के किसानों को भी ग्रीष्मकालीन तिल की खेती अपनाने और नई तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रही है।
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