राज्य कृषि समाचार (State News)

कटनी-जबलपुर के किसानों के लिए बड़ी सौगात! ₹1432 करोड़ की बहोरीबंद सिंचाई परियोजना से 183 गांवों तक पहुंचेगा पानी

13 जुलाई 2026, कटनी: कटनी-जबलपुर के किसानों के लिए बड़ी सौगात! ₹1432 करोड़ की बहोरीबंद सिंचाई परियोजना से 183 गांवों तक पहुंचेगा पानी – वर्षों से मानसून की अनिश्चितता और सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण खेती में कठिनाइयों का सामना कर रहे कटनी और जबलपुर जिले के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। करीब 1,432.77 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों जिलों के 183 गांवों की 46,716 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत जल स्रोत से 17.35 क्यूमेक पानी का उद्वहन किया जाएगा, जिसके संचालन के लिए 25.15 मेगावाट विद्युत क्षमता का उपयोग होगा। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जल प्रबंधन पर आधारित यह योजना क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कटनी और जबलपुर के 183 गांव होंगे लाभान्वित

इस परियोजना से कटनी जिले के 167 गांवों की 44,334 हेक्टेयर कृषि भूमि और जबलपुर जिले की मझौली तहसील के 16 गांवों की 2,383 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। कटनी जिले में सबसे अधिक लाभ बहोरीबंद तहसील को मिलेगा, जहां 95 गांवों की 22,103 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इसके अलावा स्लीमनाबाद के 48 गांवों की 15,303 हेक्टेयर, रीठी के 22 गांवों की 6,314 हेक्टेयर तथा कटनी तहसील के 2 गांवों की 613 हेक्टेयर भूमि भी इस योजना से लाभान्वित होगी।

एक फसल से दो और तीन फसलों तक का सफर

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की खेती का स्वरूप बदल जाएगा। जिन खेतों में अभी तक केवल एक फसल ली जाती थी, वहां किसान साल में दो से तीन फसलें लेने में सक्षम होंगे। खरीफ और रबी दोनों मौसम में सिंचाई उपलब्ध होने से उत्पादन बढ़ेगा और मौसम की अनिश्चितताओं का असर भी कम होगा।

नकदी फसलों और बागवानी को मिलेगा बढ़ावा

पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने के बाद किसान गेहूं, धान और चना जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियां, दलहन, तिलहन और अन्य नकदी फसलों की खेती भी बड़े स्तर पर कर सकेंगे। इससे खेती का विविधीकरण होगा, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार आने की उम्मीद है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार

बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना केवल खेतों तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वहीं, कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पलायन में कमी आने की संभावना है।

2029 में बदलेगी क्षेत्र की कृषि तस्वीर

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसी को परियोजना का निर्माण कार्य जल्द शुरू कर निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2029 में जब इस परियोजना का पानी खेतों तक पहुंचेगा, तब यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं होगी, बल्कि हजारों किसान परिवारों के लिए आर्थिक मजबूती और कृषि समृद्धि की नई शुरुआत बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बहोरीबंद माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना आने वाले वर्षों में कटनी और जबलपुर के कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

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