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राज्य कृषि समाचार (State News)

कटनी के किसान ने अपनाई चिया की खेती, बेहतर उत्पादन के साथ मिला अच्छा मुनाफा  

17 सितंबर 2026, कटनी: कटनी के किसान ने अपनाई चिया की खेती, बेहतर उत्पादन के साथ मिला अच्छा मुनाफा – मध्यप्रदेश के कटनी जिले के ग्राम चरगवां, तहसील स्लीमनाबाद के किसान संदीप तिवारी ने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर चिया की खेती को अपनाया। आत्मा योजना के तकनीकी मार्गदर्शन और प्राकृतिक कृषि पद्धति के जरिए किए गए इस प्रयोग से उन्हें बेहतर परिणाम और अच्छा मुनाफा मिला। आधा एकड़ से शुरू किया गया चिया का प्रयोग अब उनकी खेती का अहम हिस्सा बन गया है।

बढ़ती लागत के बीच तलाश रहे थे नई राह

संदीप कई वर्षों से खरीफ में धान और रबी में गेहूं की खेती करते थे। खेती का अनुभव बढ़ने के साथ बीज, सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों की लागत भी बढ़ रही थी। इसके बावजूद उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही थी। रासायनिक खेती के लगातार इस्तेमाल का असर भूमि की गुणवत्ता पर भी दिखाई देने लगा। ऐसे में उन्होंने कम लागत में बेहतर आय के लिए नई फसल और तकनीक अपनाने का फैसला किया।

आत्मा योजना से मिला तकनीकी मार्गदर्शन

आत्मा योजना के अमले ने संदीप को चिया की खेती और प्राकृतिक कृषि पद्धति की जानकारी दी। इसके साथ ही जीवामृत और बीजामृत तैयार करने तथा उनके उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। संदीप ने पहले छोटे क्षेत्र में नई तकनीक को आजमाने का निर्णय लिया, ताकि परिणाम के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जा सके।

आधा एकड़ में शुरू किया चिया का प्रयोग

वर्ष 2024-25 में आत्मा योजना के तहत संदीप को प्रदर्शन के लिए आधा एकड़ क्षेत्र में चिया का बीज उपलब्ध कराया गया। बीज उपचार के बाद इसकी बोनी की गई और फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई की गई। फसल तैयार होने पर बेहतर परिणाम मिले। इससे संदीप का भरोसा बढ़ा कि परंपरागत फसलों के साथ नई और लाभकारी फसलों को अपनाकर खेती की आय बढ़ाई जा सकती है।

धान की खेती में भी अपनाई वैज्ञानिक पद्धति

संदीप ने चिया के साथ धान की खेती में भी वैज्ञानिक तकनीक अपनाई। आत्मा योजना के मार्गदर्शन में उन्नत किस्म का बीज लेकर पौध तैयार की गई। करीब 15 दिन की पौध की निर्धारित दूरी पर रोपाई की गई और फसल में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया गया। बेहतर प्रबंधन का असर उत्पादन पर दिखाई दिया। पिछले खरीफ की तुलना में इस वर्ष धान का उत्पादन बढ़ा और संदीप को 61 हजार 200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

रबी में भी चिया से मिला मुनाफा

रबी सीजन में गेहूं के साथ चिया की खेती ने संदीप के अनुभव को और मजबूत किया। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार खेती करने से उन्हें बेहतर परिणाम मिले और 51 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ। कम लागत में मिले आर्थिक लाभ से उनका चिया की खेती पर भरोसा और बढ़ा।

अब दूसरे किसानों को प्रेरित करने का लक्ष्य

संदीप वर्ष 2026 में लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में चिया की खेती कर रहे हैं। उनका लक्ष्य आने वाले वर्ष में 50 से 100 किसानों को चिया की खेती के लिए प्रेरित करना है, ताकि अन्य किसान भी कम लागत में बेहतर आय के विकल्प तलाश सकें। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वय खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकता है।

चरगवां में संदीप के खेत में की गई चिया की खेती अब नई फसल के प्रयोग से आगे बढ़कर नई सोच और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

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