KVK पंजाब में मधुमक्खी पालन पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, 40 किसानों ने लिया भाग
09 जुलाई 2025, संगरूर: KVK पंजाब में मधुमक्खी पालन पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, 40 किसानों ने लिया भाग – पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशालय विस्तार शिक्षा और ICAR-ATARI, जोन-1, लुधियाना के तत्वावधान में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), संगरूर द्वारा दिनांक 30.06.25 से 04.07.25 तक “मधुमक्खी पालन – एक लाभदायक पूरक व्यवसाय” विषय पर पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में मालेरकोटला, पटियाला और संगरूर जिलों के 40 किसान और महिला कृषकों ने भाग लिया।
मधुमक्खी पालन से अतिरिक्त आमदनी और रोजगार के अवसर: डॉ. मंदीप सिंह
प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. मंदीप सिंह, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए मधुमक्खी पालन की महत्ता और आर्थिक लाभ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कृषि के साथ किया जा सकने वाला एक लाभदायक पूरक व्यवसाय है, जिससे परिवार के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार सृजित किया जा सकता है। उन्होंने केंद्र द्वारा किए जा रहे अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जन-संपर्क गतिविधियों की जानकारी भी साझा की।
मधुमक्खी पालन के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी
डॉ. गुरबीर कौर, सहायक प्रोफेसर (पादप रोग विज्ञान) ने इस प्रशिक्षण की प्रशिक्षण समन्वयक के रूप में भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन के उपकरणों, उनके उपयोग, शहद के पोषक और औषधीय गुणों, मधुमक्खियों की प्रजातियाँ, और इटैलियन मधुमक्खियों की साल भर की देखभाल और पालन विधियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने शरद, शीत, ग्रीष्म और वसंत ऋतु में मधुमक्खियों की उचित देखभाल एवं प्रबंधन का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रोपोलिस, मोम, रॉयल जेली, पराग आदि जैसे उप-उत्पादों, और मधुमक्खियों में होने वाले प्रमुख रोगों एवं कीटों के लक्षणों और उनके नियंत्रण की विधियों के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
अनुदान और बैंकिंग योजनाओं की जानकारी भी दी गई
डॉ. कुलविंदर सिंह, बागवानी विकास अधिकारी, संगरूर ने राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड एवं राज्य बागवानी विभाग की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी और वित्तीय सहायता योजनाओं के बारे में बताया।
श्री पंकज कुमार, भारतीय स्टेट बैंक, संगरूर से, ने मधुमक्खी पालकों के लिए उपलब्ध बैंकिंग योजनाओं की जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषकों को आत्मनिर्भर और बहुउपायोजी आय के स्रोत प्रदान करने की दिशा में एक सराहनीय पहल रही।
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