भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर का 35 वां स्थापना दिवस आज

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9 दिसंबर 2021, इंदौर । भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर का 35 वां  स्थापना दिवस आज– इंदौर स्थित भा.कृ.अनु.प.-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान आज 9 दिसंबर को जूम एप पर वर्चुअल मोड के माध्यम से अपने मुख्य परिसर में अपना 35वां स्थापना दिवस मना रहा है। यह संस्थान सोयाबीन उत्पादक राज्यों के किसानों के बीच में उन्नत सोयाबीन उत्पादन प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ उन्नत बीज किस्मों के विकास और प्रचार के लिए जाना जाता है ।

 स्थापना दिवस कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित सदस्य, डॉ. संजीव गुप्ता, सहायक महानिदेशक (तिलहन और दलहन), भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली और श्री. डी.एन. पाठक, कार्यकारी निदेशक, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) अपना उद्बोधन देंगे। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. तिलक राज शर्मा, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली होंगे, जो कि इस वर्ष स्वर्गीय डॉ. प्रेम स्वरूप भटनागर स्मृति व्याख्यान की श्रृंखला में दूसरा स्मृति व्याख्यान – सोयाबीन प्रजनन की नयी तकनीकियों  द्वारा सोयाबीन में सुधार शीर्षक पर संस्थापक निदेशक- डॉ. प्रेम स्वरुप भटनागर की स्मृति में देंगे, जिन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी इस संस्थान की स्थापना और विकास में अपना वैज्ञानिक जीवन समर्पित किया। समारोह की अध्यक्षता पी.पी.वी. एंड एफ.आर. के पूर्व अध्यक्ष और कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के पूर्व कुलपति डॉ. आर. आर. हंचिनल करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत  भा.कृ.अनु.प.-भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की कार्यवाहक निदेशक, डॉ.नीता खांडेकर  के स्वागत भाषण एवं संस्थान की संक्षिप्त शोध उपलब्धियों के साथ की जाएगी। इस कार्यक्रम में  संस्थान से  सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा  जिन्होंने सोयाबीन की फसल और संस्थान के समग्र विकास में योगदान दिया है। इसके अलावा सोयाबीन फसल के हितधारकों को भी इस अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा।

संस्थान इस अवसर पर चार प्रकार के प्रकाशनों का भी विमोचन भी करेगा जिसमें राजभाषा पत्रिका“सोयावृतिका” जिसमें किसान, वैज्ञानिक, विद्यार्थी एवं संस्थान के कर्मचारियों के लेख, कविताएँ और विचारशामिल हैं, “अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसन्धान परियोजना की अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन” पर ई-बुक,“सोयाबीन में अजैविक तनावों का प्रबंधन”, “किसान सोयाबीन बीज को किस तरह भंडारित करें” और “किसानोंके स्तर पर सोयाबीन बीज के अंकुरण की जांच” पर लीफ फ़ोल्डर्स और “सोयाबीन खेती के उन्नत तरीके,नवीनतम पद्धतियां  एवं तकनिकी  अनुशंसाएं ” पर विस्तार पत्रिका शामिल हैं । इस अवसर पर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के संस्थान की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत आनेवाले प्रगतिशील किसानों को “प्रगतिशील कृषक सम्मान” से सम्मानित किया जायेगा।अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रमुख वैज्ञानिक और आयोजन सचिव द्वारा किया जायेगा। कार्यक्रम का समापन  राष्ट्र गान से होगा। मध्यान्ह भोजन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।
   

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