शिमला मिर्च में बायो फर्टिलाईजर का प्रयोग करें

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विपुल उत्पादन हेतु वैज्ञानिक सलाह

टीकमगढ़। कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ के डॉ. बी.एस. किरार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. एस.के. खरे, डॉ. यू.एस. धाकड़ एवं डॉ. आर.के. प्रजापति, वैज्ञानिकों द्वारा विगत दिवस गांव पराखास में कृषक कैलाश नारायण यादव के खेतों पर भ्रमण कर शिमला मिर्च के विपुल उत्पादन हेतु तकनीकी सलाह दी गयी। वैज्ञानिकों ने बताया कि मिर्च में चूसक कीड़ों का उचित प्रबंधन करने हेतु नियमित 15-20 दिन के अंतराल से जैविक या रसायनिक दवाओं का प्रयोग करना आवश्यक है। कृषि विज्ञान केन्द्र से शिमला मिर्च में स्यूडोमोनास पोटाश घोलक जीवाणु एवं जिंक घोलक जीवाणु तरल जैब उर्वरकों का प्रयोग कराया गया। जिससे फसल एवं फल की बढ़वार में वृद्धि देखी गयी और कैलाश नारायण यादव ने जैव उर्वरक का प्रयोग टमाटर, पत्तागोभी एवं गेहूं में किया है जिससे फसल में परिणाम अलग से दिखाई दे रहे है। मिर्च में श्यामवर्ण, फल विगलन, रोग प्रबंधन हेतु ब्लाइटॉक्स 50 प्रतिशत और मोजेक तथा पर्ण कुंचन रोग हेतु इमिडाक्लोप्रिड या एसीफेट या फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस.सी. दवा डालने की सलाह दी गयी।

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