यूरिया संकट नहीं

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सरकार की सफाई

भोपाल। पिछले माह तक यूरिया की कमी झेल रहे हैं प्रदेश के किसानों के लिए राहत की खबर यह है कि इस माह यूरीया की सतत आवक से स्थिति में सुधार हुआ है। प्रदेश के सभी क्षेत्रों में यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। प्रदेश के कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में 1 अक्टूबर से 19 नवम्बर तक यूरिया की कुल उपलब्धता 6 लाख 75 हजार मी. टन रही जबकि रबी 2018-19 की इसी अवधि में यूरिया की उपलब्धता 6 लाख 37 हजार मी. टन थी। इसी तरह रबी 2018-19 में 1 अक्टूबर से 19 नवंबर तक 3 लाख 71 हजार मी. टन यूरिया का विक्रय हुआ था जबकि चालू रबी सीजन की इसी अवधि में 4 लाख 32 हजार मी. टन का विक्रय हो चुका है। हालांकि पिछले वर्ष के रबी सीजन की तुलना में इस रबी सीजन में बुवाई की गति धीमी है, क्योंकि इस वर्ष मध्य अक्टूबर तक वर्षा होती रही है जिसके कारण खेतों में बोनी की स्थिति नहीं बन पाई। सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण व्यवस्था की जिम्मेदार संस्था मार्कफेड के अनुसार प्रदेश में अभी भी 2 लाख 43 हजार मी. टन यूरिया का स्टॉक बना हुआ है, जिसमें से 93 हजार मी. टन सहकारी क्षेत्र में है और 1 लाख 50 हजार मी. टन निजी क्षेत्र में स्टॉक है।
गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष इस अवधि में 16 प्रतिशत से अधिक यूरिया विक्रय के पीछे विशेषज्ञों द्वारा यह अनुमान लगाया जा रहा है कि किसानों ने भविष्य में यूरिया संकट की संभावना के चलते पूरे रबी सीजन के लिये आवश्यक यूरिया की एकमुश्त खरीद कर ली है। परन्तु अभी भी यूरिया की मांग बनी रहेगी क्योंकि राज्य की प्रमुख रबी फसल गेहूं की बुवाई अपने लक्ष्य 64 लाख हे. के विरूद्ध केवल 10-12 प्रतिशत ही हुई है।
इसलिये शासन को ध्यान देना होगा कि दिसम्बर मे ंभी केंद्र से म.प्र. के लिये यूरिया का उचित मात्रा में आवंटन हो और कम्पनियां भी प्रदेश में अबाधित आपूर्ति करती रहें।

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