मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग गत 7 महीनों में 5 आयुक्त बदले

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म.प्र. उद्यानिकी विभाग 

गत 7 महीनों में 5 आयुक्त बदले

भोपाल। म.प्र. का उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग अपने कारनामों के चलते हमेशा चर्चा में बना रहता है। कभी शेडनेट, कभी पॉलीहाऊस, कभी ड्रिप स्प्रिंकलर के अनुदान में गड़बड़ी तो कभी कुछ और। इस बार विभाग अपने आयुक्त की पदस्थापना को लेकर चर्चा में है। विगत 7 माह में 5 आयुक्त बदल गए हैं। इतना तो आम भी नहीं बौराता जितना म.प्र. का उद्यानिकी विभाग।

प्रदेश की कांग्रेस सरकार का तबादला उद्योग का असर उद्यानिकी आयुक्त के पद पर पूरे शबाब से आया। वैसे शबाब तो पूरे प्रदेश के अधिकारी- कर्मचारी पर आया, आईएएस अधिकारी भी अछूते नहीं रहे, परन्तु विचारणीय यह है कि इतने तबादलों के बाद भी क्या सरकार ढंग से चल रही है? सभी मोहरे एवं प्यादों ने सरकार की मंशानुसार अपनी-अपनी जगह सम्हाल ली है। यदि हां है, तो सरकार कछुआ चाल से क्यों चल रही, इसे फर्राटा भरना चाहिए। वैसे भी मुख्यमंत्री ने कृषि तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अधिक निवेश तथा औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने की मंशा जाहिर की है।

दूसरी तरफ उद्यानिकी आयुक्त सह संचालक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बार-बार बदलाव करने से उद्यानिकी विकास गति नहीं पकड़ पा रहा है। लोकसभा चुनाव के पूर्व श्री सत्यानंद उद्यानिकी आयुक्त सह संचालक पद पर पदस्थ थे। उनके पश्चात वन विकास निगम के एमडी श्री यू.के. सुबुद्धि को पदस्थ किया, उन्होंने ज्वाईन ही नहीं किया। इसके पश्चात चुनावी दौर में श्री अनिरुद्ध मुखर्जी को पीएस, उद्यानिकी आयुक्त तथा एमपी एग्रो के एमडी का प्रभार दिया गया। इसके बाद वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी श्री कविन्द्र कियावत को उद्यानिकी आयुक्त बनाया गया परन्तु साथ-साथ उनकी ड्यूटी लोकसभा चुनाव महाराष्ट्र में पर्यवेक्षक के रूप में लगा दी गई। इधर श्री मुखर्जी पद सम्हालते रहे। अब श्री कियावत के बाद आईएफएस श्री काली दुरई को उद्यानिकी आयुक्त बनाया गया है। उन्होंने समाचार लिखे जाने तक पदभार ग्रहण नहीं किया है।

बार-बार मुखिया बदल जाने से योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी असर पड़ा है। लगभग 11 योजनाएं एमपी एग्रो को क्रियान्वयन के लिए सौंप दी गई है। वहीं ड्रिप एवं स्प्रिंकलर पर टॉपअप सब्सिडी हटाने से अब किसानों को अधिक कीमत चुकानी होगी। नित नए दिशा-निर्देशों से मैदानी अधिकारियों किसानों को परेशानी हो रही है तथा उद्यानिकी विकास अवरुद्ध हो रहा है।

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