राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

बे-मौसमी बारिश ने बिगाड़ी भारत की अंगूर फसल, 30% तक पैदावार घटने की आशंका, निर्यात कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी सम्भव

02 नवंबर 2025, नई दिल्ली: बे-मौसमी बारिश ने बिगाड़ी भारत की अंगूर फसल, 30% तक पैदावार घटने की आशंका, निर्यात कीमतों में 15% तक बढ़ोतरी सम्भव – भारत का 2025-26 अंगूर सीजन इस बार किसानों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं साबित हो रहा है। महाराष्ट्र के नासिक और सांगली जैसे प्रमुख अंगूर उत्पादक इलाकों में लगातार हो रही असमय बारिश ने फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस सीजन में अंगूर की पैदावार में 20-30% तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

मई के मध्य में हुई शुरुआती बारिश ने अंगूर की फ्लावरिंग स्टेज को नुकसान पहुँचाया, जिसे भरपूर धूप की जरूरत होती है। इस दौरान 1000 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे न केवल पौधों की बढ़वार रुकी, बल्कि फलों में कीटों, खासकर फ्रूट फ्लाई का प्रकोप भी बढ़ गया। बारिश का सिलसिला अक्टूबर तक जारी रहा, जिससे फसल पुनर्बहाली की उम्मीदें कम होती गईं।

निर्यातकों का मानना है कि दिसंबर से शुरू होने वाली निर्यात अवधि में अंगूर की कम उपलब्धता के चलते शुरूआती दिनों में कीमतों में 10-15% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। भारत मुख्य रूप से थॉम्पसन सीडलेस, सोनाका सीडलेस, शरद जंबो और क्रिमसन जैसी किस्मों का यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में निर्यात करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारत को बड़े दानों वाली और अधिक शेल्फ-लाइफ वाली किस्मों पर तेजी से काम करना होगा। दक्षिण अफ्रीका और चिली जैसे देशों की किस्में इसी तरह के वैश्विक मानकों पर खरी उतरती हैं।

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हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। कई किसान नई किस्मों की ट्रायल खेती कर रहे हैं जो मौसम के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरह से झेलने में सक्षम दिखाई दे रही हैं। कृषि जानकारों का मानना है कि धैर्य, नवाचार और तकनीकी अपनाने से यह कठिन सीजन एक अवसर में भी बदल सकता है।

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