केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने रांची में ICAR-IIAB की नई सुविधाओं का किया उद्घाटन, 1,500 किसानों ने लिया हिस्सा
09 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने रांची में ICAR-IIAB की नई सुविधाओं का किया उद्घाटन, 1,500 किसानों ने लिया हिस्सा – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 अक्टूबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रांची स्थित आईसीएआर–भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB) की विभिन्न नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्थान में आयोजित प्री-रबी किसान गोष्ठी-सह-कृषि इनपुट वितरण कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के लगभग 1,500 किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी देना और किसानों, वैज्ञानिकों तथा नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना था।
ICAR-IIAB में नई सुविधाओं का उद्घाटन
केंद्रीय कृषि मंत्री ने संस्थान में एडमिन-कम-स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और NEXTGEN Breeding Facility का उद्घाटन किया। इसके साथ ही संस्थान में नए गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी गई, जिसकी लागत 119 करोड़ रुपये है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक और पारंपरिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां की जनजातीय परंपराओं में जल, पौधों और प्रकृति के अन्य तत्वों के संरक्षण की गहरी समझ मौजूद है। उन्होंने ICAR-IIAB को अनुसंधान, नवाचार और आत्मनिर्भरता का संगम बताया।
पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने झारखंड की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फसलों एवं किस्मों का चयन करने, किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने तथा कृषि अनुसंधान संस्थानों की तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने सब्जियों, अनाज और पशुधन को शामिल करते हुए एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और उर्वरकों के उचित उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई। साथ ही नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
चौहान ने किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक गांव तक पहुंचाने और आगामी रबी मौसम के लिए किसानों को वैज्ञानिक जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों के ‘लैब टू लैंड’ प्रयासों की सराहना करते हुए आने वाले दिनों में देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने का भी आह्वान किया।
आधुनिक कृषि तकनीकों और मृदा परीक्षण पर जोर
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने संबोधन में देश की खाद्य सुरक्षा और विकास में किसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और कृषि विज्ञान केंद्रों को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ किसानों को अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से किसानों को सुरक्षित रखने तथा किसान कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई।
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पूर्वी भारत में कृषि क्षेत्र में नई क्रांति की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने झारखंड में कृषि अनुसंधान एवं ज्ञान संस्थानों को मजबूत करने, राइस-फैलो इंटेंसिफिकेशन को व्यापक स्तर पर अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलों एवं किस्मों का चयन करने पर जोर दिया।
उन्होंने पशुधन उत्पादकता बढ़ाने तथा अम्लीय मिट्टी और फास्फोरस की कमी जैसी कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही आगामी रबी मौसम के लिए उचित कृषि योजना तैयार करने और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने कृषि अनुसंधान को किसानों की जरूरतों के अनुरूप बनाने और विकसित तकनीकों को अंतिम किसान तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों के उचित मार्गदर्शन और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में उनके लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के महत्व को भी रेखांकित किया।
किसानों को दिए गए कृषि और पशुधन से जुड़े इनपुट
किसान गोष्ठी में किसानों को झारखंड में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के अवसर, एथनो-वेटरिनरी मेडिसिन, डेयरी फार्मिंग, फल फसलों की उत्पादन तकनीक, रबी फसलों में समेकित कीट प्रबंधन (IPM), फसल विविधीकरण, एकीकृत कृषि प्रणाली, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पशुधन आहार प्रबंधन और लाख की खेती जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।
किसानों ने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद कर उन्नत कृषि एवं पशुपालन पद्धतियों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। इस दौरान किसानों के बीच नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, मिनरल मिक्सचर, उन्नत बीज, गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के बीज किट वितरित किए गए। इसके अलावा मिल्क कैन कूलर तथा उच्च उत्पादकता वाली टमाटर और बैंगन की बीज किस्में सहित विभिन्न कृषि एवं पशुधन इनपुट भी बांटे गए।
कार्यक्रम में ICAR संस्थानों और झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें कृषि फसलों, पशुधन एवं डेयरी तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों, कृषि योजनाओं और किसानोन्मुख नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर ICAR संस्थानों द्वारा विकसित विभिन्न प्रकाशनों एवं प्रौद्योगिकियों का विमोचन भी हुआ।
कृषि अनुसंधान सुविधाओं का किया अवलोकन
कार्यक्रम से पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने डॉ. एम. एल. जाट, डॉ. डी. के. यादव, ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित और संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. विजय पाल भदाना के साथ संस्थान की विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन किया।
उन्होंने डेयरी फार्म, फसल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, NEXTGEN Breeding Facility और एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) इकाई का भ्रमण किया। डेयरी फार्म में उन्हें पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer) तकनीक की जानकारी दी गई। वहीं, IFS इकाई में उन्होंने किसानों से संवाद किया और एकीकृत कृषि प्रणाली, कृषि अपशिष्ट पुनर्चक्रण तथा संसाधनों के कुशल उपयोग वाली कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। मंत्री ने पौधरोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया और प्रगतिशील किसानों से बातचीत की।
इस अवसर पर ICAR-IIAB के पूर्व अधिकारियों और संस्थान के विकास में योगदान देने वाले विशेषज्ञों को भी सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. आर. रमानी, डॉ. के. के. शर्मा, डॉ. तिलक राज शर्मा और संस्थान के प्रथम नियमित निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में ICAR-IIAB के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने झारखंड के किसानों के हित में किसान, वैज्ञानिक और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद मजबूत करने तथा कृषि अनुसंधान एवं नवाचारों को खेतों तक पहुंचाने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।
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