राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

दो दिवसीय इंटरनेशनल सोया कॉन्क्लेव इंदौर में संपन्न  

19 अक्टूबर 2024, इंदौर: दो दिवसीय इंटरनेशनल सोया कॉन्क्लेव इंदौर में संपन्न –  ‘एडिबल ऑइल्स और प्रोटीन- विज़न 2030’ थीम पर आधारित दो दिवसीय इंटरनेशनल सोया कॉन्क्लेव -2024 गत दिनों इंदौर में संपन्न हो गई।  जिसमें सोया इंडस्ट्री से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों ,नई तकनीकों , भारत में सोया इंडस्ट्री की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा कर गहन विचार-विमर्श किया गया। पहले दिन जहाँ फ्यूचर्स ट्रेडिंग और टेक्नोलॉजी सेशन में विभिन्न विषयों पर पक्ष रखे गए ,वहीं  दूसरे दिन प्राइस आउटलुक सेशन और मार्केट आउटलुक सेशन में बाजार के भविष्य पर चर्चा की गई।

इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गड़करी और प्रदेश के मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के अलावा प्रतिष्ठित वक्ताओं डॉ. आर. के. माथुर, डायरेक्टर, इंडियन  इंस्टीट्यूट  ऑफ ऑइलसीड्स रिसर्च,डॉ. के. एच. सिंह, डायरेक्टर, इंडियन  इंस्टीट्यूट  ऑफ सोयाबीन रिसर्च, इंदौर ,श्री डॉ. रतन शर्मा, श्री जी. चंद्रशेखर,श्री रामनाथ सूर्यवंशी, याशी श्रीवास्तव ने अपने विचार व्यक्त किए।  इस मौके पर सोपा के पदाधिकारी डॉ. डेविश जैन, चेयरमैन, श्री गिरीश मतलानी, सेक्रेटरी और श्री नरेश  गोयनका, डिप्टी चैयरमेन भी उपस्थित थे।

डॉ माथुर ने  किसी एक फसल के बजाय  एक से अधिक फसल पर ध्यान देने पर ज़ोर देते हुए कहा कि  यह प्रॉफिट रेश्यो बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। वैल्यू चैन मजबूत बनाने के लिए  इसमें एफपीओ को भी शामिल   किया जाए  । वहीं डॉ. सिंह ने गत एक दशक से ऑइल सीड्स में नंबर 1 हमारे देश  के इस वर्ष दूसरे स्थान पर  पहुँचने  पर चिंता व्यक्त करते हुए  कहा कि उत्पादन बढ़ाने पर कीमत को किफायती बनाया जा सकेगा। डॉ. शर्मा ने सोयाबीन के स्टोरेज  में ह्यूमिडिटी की भूमिका को अहम  बताते हुए कहा कि  यदि स्टोरेज उचित नहीं होगा, तो इसकी गुणवत्ता भी उचित नहीं होगी।आपने आदर्श टेम्परेचर 10-15%, ह्यूमिडिटी 60-70%, मॉइश्चर कॉन्टेंट 12-14% और हवा के साथ वेंटिलेशन का ध्यान  रखने को कहा। । सोयाबीन के वैश्विक दृष्टिकोण और इसके भारतीय बाजार पर प्रभाव  पर श्री जी. चंद्रशेखर, ने  सोयाबीन को फूड , फीड और  फ्यूल   बताया और  कहा कि  प्रोटीन की कमी को दूर करने में सोया प्रोडक्ट्स काफी सहायक है। सोयाबीन का उत्पादन अगले 10 वर्षों में 0.8% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले 10 वर्षों में यह 2.0% दर्ज किया गया था। वहीं, रूस, यूक्रेन, कनाडा में वृद्धि के साथ वैश्विक सोयाबीन उत्पादन 2023 में ~400 एमएमटी से बढ़कर 2033 में 430 एमएमटी तक बढ़ने का अनुमान है।

मॉडरेटर श्री डी. एन. पाठक  ने फ्यूचर्स ट्रेडिंग सेशन का नेतृत्व  किया।  इस सत्र में फ्यूचर्स ट्रेडिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए।  पैनल में श्री अजय केडिया, श्री बदरुद्दीन (एमसीएक्स), श्री अमित जैन (एबिस एक्सपोर्ट्स) और श्री मनोज अग्रवाल (एमओईएल) ने भाग लिया। टेक्नोलॉजी सेशन में, श्री रवि घोलसगांव (डीवीसी प्रोसेस टेक्नोलॉजिस्ट) ने ‘एडिबल ऑइल रिफाइनिंग- सस्टेनेबिलिटी’ पर और श्री नचिकेत मुले (प्रबंध निदेशक, ई शक्ति बाइनरी करंट्स प्रा. लि.) ने ‘सोयाबीन रिफाइनिंग 2.0: टोकोफेरोल, फाइटोस्टेरोल और सोया बाई-प्रोडक्ट्स से कंसन्ट्रेटेड फैटी एसिड्स’ पर प्रेज़ेंटेशन दिया। इस सत्र में श्री अमित ठक्कर (गफ्ता क्वालिफाइड आर्बिट्रेटर), श्री पी. के. व्यास (एवी एग्री बिज़नेस) और श्री आयुष्यमान चौधरी (अधिवक्ता, इंदौर हाईकोर्ट) ने सोपा के मॉडल कॉन्ट्रैक्ट और विवाद से संबंधित समाधान प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। डॉ. सुरेश मोटवानी (सॉलिडारिडाड) ने सोया मूल्य श्रृंखला में ‘स्थायी सोया के लिए भारतीय मानकों की भूमिका’ पर चर्चा की। श्री जी.के. सूद के नेतृत्व में ‘डीडीजीएस और सोयाबीन इंडस्ट्री पर इसके प्रभाव’ पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें डॉ. गिरीश कोलवंकर, प्रीमियम चिक्स, श्री ए. जानकीरमन, सुगुना फूड्स लि और श्री संजय श्रीश्रीमाल, केएन ग्रुप शामिल हुए।

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री  नितिन गड़करी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत को दुनिया की 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए देश में से इम्पोर्ट को कम और एक्सपोर्ट को बढ़ाना होगा। जहाँ तक  एडिबल ऑइल का सवाल है, हम 60% से भी अधिक इम्पोर्ट पर निर्भर हैं। देश में मलेशिया से जो पाम ऑइल आता है, उसकी वजह से किसानों को उचित  मुआवजा  मिलने में अड़चन आती है।  एक अन्य मुद्दा विश्व बाजार में सोया केक के मूल्य का है। हमारा देश काफी संशोधन के बाद भी सोया केक को इम्पोर्ट करता है। बीज की उत्पादकता को बढ़ाने  प्रयास जारी हैं। हमारे मौजूदा प्लांट्स  का  पूरी क्षमता से उपयोग नहीं  हो पा रहा है। इम्पोर्ट की वजह से खर्च बढ़ जाते हैं।  एडिबल ऑइल का उपयोग के मुताबिक उत्पादन देश में ही होना चाहिए।

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दूसरे दिन  की कॉन्क्लेव  के मुख्य अतिथि  प्रो. विजय पॉल शर्मा, चेयरमैन,  कृषि लागत एवं मूल्य आयोग , भारत सरकार और विशेष अतिथि राज्य के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट थे। श्री सिलावट ने  सोया का संबंध उद्योगपतियों और अन्नदाता दोनों से बताते हुए कहा कि  इन दोनों को बेहतर सुविधाओं की ज़रूरत  है। सोपा इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। टेक्नोलॉजी सेशन में  श्री अजिंक्य चामे (डीवीसी प्रोसेस टेक्नोलॉजिस्ट्स) द्वारा बायो डीज़ल प्रोसेस ऑप्टिमाइज़ेशन पर तथा  दूसरा  सेशन, जो कि  एंजाइमेटिक डिगमिंग और तेल उपज बढ़ाने के लिए नए रास्तों पर आधारित था, जिसे श्री ओरे मोरेनो (डीएसएम) ने प्रस्तुत किया। वहीं, तीसरा सेशन श्री एलेक्सी शिवचेंको (अल्फा लेवल) ने लिया, जो कि अल्फा लेवल नावेल डिऑडराइज़ेशन पर आधारित था। नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श पर आधारित सेशन के साथ ही प्राइस आउटलुक सेशन और मार्केट आउटलुक सेशन आयोजित किए गए। सेशन का संचालन मनीषा गुप्ता, सीएनबीसी आवाज़, ने किया। वहीं, पैनलिस्ट्स के रूप में श्री संजय श्रीश्रीमाल , श्री संजीव अस्थाना, श्री ए. जानकी रमन, श्री मेहुल अग्रवाल, श्री संदीप गुहा, श्री सुधाकर देसाई, श्री विवेक पाठक, श्री अजय परमार, श्री अमित जैन और श्री अतुल मुंद्रा शामिल हुए। मार्केट आउटलुक सेशन के अंतर्गत श्री विवेक पाठक (अथीना ट्रेडविंड्स) ने सोयाबीन ऑइल पर फंडामेंटल आउटलुक विषय पर प्रेज़ेंटेशन  में  पिछली तिमाही में बाजार की अस्थिरता में भू-राजनीतिक तनाव, मौसम की परिस्थितियाँ और माँग के उतार-चढ़ाव  मुख्य कारक  रहे । पाम ऑइल, सोयाबीन ऑइल और सनफ्लॉवर ऑइल पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिसमें से पाम ऑइल की लागत उच्चतम है। वहीं, श्री के.एन. रहमान (ग्रीनलीफ रिसर्च) ने सोयाबीन पर फंडामेंटल आउटलुक के बारे में  बताया कि वैश्विक खपत में 62% हिस्सेदारी के साथ सोयाबीन अग्रणी है। वैश्विक तेल उत्पादन में सोया ऑइल की हिस्सेदारी पाम ऑइल के बाद 28% है। अगले वर्ष विश्व भोजन उत्पादन में 1 एमएमटी की वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके बाद क्रॉप आउटलुक सेशन के दौरान सोपा द्वारा प्रस्तुत सोयाबीन फसल अनुमानों के साथ व्यापार और उद्योग से फसल आँकड़े साझा किए गए।

सोपा द्वारा किए गए सर्वे  में  सोयाबीन उत्पादन के प्रथम अनुमान आंकड़े जारी करते हुए सोपा के कार्यकारी निदेशक श्री डी एन  पाठक ने बताया कि इस खरीफ सत्र में पूरे भारत में 125.817  लाख टन सोयाबीन का उत्पादन होगा ,जो कि गत वर्ष से 5.96 % अधिक रहेगा। इस वर्ष प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 1063  किग्रा रहेगी, जो कि गत वर्ष 1002  किग्रा / हेक्टेयर  थी।

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