राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

हरियाणा में SRBSDV वायरस ने 92,000 एकड़ धान की फसल को किया बौना, 7 जिलों में फैला प्रकोप

28 अगस्त 2025, नई दिल्ली: हरियाणा में SRBSDV वायरस ने 92,000 एकड़ धान की फसल को किया बौना, 7 जिलों में फैला प्रकोप – हरियाणा सरकार ने दक्षिणी चावल काली धारीदार बौने वायरस (SRBSDV) को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विधानसभा में कांग्रेस के आदित्य सुरजेवाला द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में राज्य में दक्षिणी चावल काली धारीदार बौना वायरस (SRBSDV) की गंभीर स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लगभग 40 लाख एकड़ में बोई गई धान की फसल में से करीब 92,000 एकड़ प्रभावित पाए गए हैं। यह वायरस व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर नामक कीट के माध्यम से फैलता है, जो पौधों का रस चूसकर संक्रमित करता है। यह संक्रमण पौधों में बौनेपन और विकास में रुकावट का कारण बनता है, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ता है।

SRBSDV वायरस क्या है और धान को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

SRBSDV एक वायरल बीमारी है जो धान की फसल को प्रभावित करती है। यह वायरस व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर (WBPH) नामक कीट के माध्यम से फैलता है। यह कीट धान के पौधों का रस चूसता है और संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों में वायरस पहुंचाता है। संक्रमित पौधों की सामान्य वृद्धि रुक जाती है, वे बौने हो जाते हैं, पत्तियां गहरे हरे रंग की हो जाती हैं, नई कलियों का विकास धीमा या रुक जाता है और जड़ें भूरी और अविकसित रह जाती हैं। इससे पौधों की पानी और पोषक तत्व अवशोषण क्षमता कमजोर हो जाती है।

खरीफ 2022 में पहली बार दिखा था वायरस

हरियाणा में यह वायरस सबसे पहले खरीफ 2022 के मौसम में देखा गया था। उस समय कुछ ही मामले सामने आए थे, लेकिन हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCS HAU), हिसार और कृषि विभाग की समय पर कार्रवाई से बड़े नुकसान को रोका गया। खरीफ 2023 और 2024 में प्रभावी रोकथाम और जागरूकता के चलते कोई गंभीर प्रकोप नहीं हुआ। मगर 2025 में यह समस्या फिर उभरी है।

किन जिलों में फैल रहा है SRBSDV वायरस?

2025 में पहली बार कैथल जिले से मामले सामने आए, इसके बाद अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, जींद और पंचकूला जिलों में भी वायरस का प्रकोप देखा गया। इन जिलों में किसानों ने अपने खेतों में पौधों के असामान्य रूप से बौने होने की शिकायत की है। सर्वेक्षण के अनुसार, यह वायरस सबसे अधिक संकर चावल की किस्मों में पाया गया, उसके बाद परमल (गैर-बासमती) और फिर बासमती किस्मों में भी।

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राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम

हरियाणा सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 235 जागरूकता शिविर आयोजित किए हैं, जिनमें 5,637 किसानों को रोग प्रबंधन और नियंत्रण के उपाय बताए गए हैं। CCS HAU के वैज्ञानिकों ने आरटी-पीसीआर तकनीक से पौधों के नमूनों की जांच कर वायरस की पुष्टि की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे “व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर” कीट नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें और कृषि वैज्ञानिकों के निर्देशों का पालन करें।

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कृषि मंत्री ने बताया कि जैविक खेती और धान की सीधी बुवाई में इस वायरस से नुकसान की सूचना नहीं है, इसलिए किसानों को समय पर बुवाई और उचित उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।

किसानों के लिए सलाह

धान की बुवाई समय पर और कृषि वैज्ञानिकों के निर्देशानुसार करें। “व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर” कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करें। साथ ही, असामान्य लक्षण जैसे बौने पौधे, गहरे हरे पत्ते, धीमी कलियां दिखने पर तुरंत अधिकारियों को सूचित करें। इसके अलावा, किसान जैविक खेती और धान की सीधी बुवाई अपनाने पर विचार करें, क्योंकि इससे वायरस का खतरा कम रहता है।

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