राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सौर ऊर्जा: अधिक सब्सिडी और बिल भी न्यूनतम

लेखक: श्री मधुकर पवार

02 अगस्त 2024, नई दिल्ली: सौर ऊर्जा: अधिक सब्सिडी और बिल भी न्यूनतम – जलवायु परिवर्तन, औद्योगिकीकरण, कांक्रीट से बनने वाले भवनों और सड़कें तथा कम होती हरियाली के कारण गरमी का प्रकोप बढ़ रहा है। इस साल गरमी के दिनों में तापमान बढ़ने के रिकार्ड भी बने हैं। गरमी के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है। ऐसे में पंखे. ए.सी. और कूलर ही एकमात्र सहारा रहता है। यदि गरमी के मौसम में बिजली बंद हो जाये तो दिन रात काटना मुश्किल हो जाता है। कहा जाता है.. बिन पानी सब सून… अब.. बिन बिजली सब सून कहें तो यह अतिशयोक्ति नहीं है। भारत में बिजली उत्पादन के प्रमुख स्रोतों में तापीय विद्युत, पवन विद्युत, जल विद्युत, परमाणु बिजली और सौर ऊर्जा है। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक बिजली का उत्पादन कोयला आधारित विद्युत सन्यंत्रों से ही होता है। इन सन्यंत्रों से निकलने वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषित होता है। जल विद्युत, पवन विद्युत और परमाणु ऊर्जा की उत्पादन लागत की तुलना में सौर ऊर्जा बहुत सस्ती होती है और इसे एक सामान्य आय वाला उपभोक्ता भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल स्थापित कर बिजली पैदा कर सकता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भारत सरकार घरों में सोलर पैनल लगाने पर 30000 रूपये से लेकर 78000 रूपये तक की सब्सिडी भी दे रही है।

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वर्तमान समय में प्राय: सभी घरों में बिजली से चलने वाले उपकरणों की संख्या बढ़ने के कारण बिजली के बिलों में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। हालांकि अनेक राज्य सरकारें बिजली के बिलों में खपत के आधार पर छूट भी दे रही हैं लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जिनके घरों के बिजली के बिल पर कोई रियायत नहीं मिलती है। इसके साथ ही बिजली कम्पनियों द्वारा समय – समय पर बिजली की दरों में इजाफा किया जाता है जिसके कारण उपभोक्ताओं को अपने घर के खर्चे का समायोजन करने भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इन सब दिक्कतों के मद्देनजर सौर ऊर्जा एक आशा की किरण बनकर हमारे सामने आई है। इसमें भारत सरकार ने भी उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर बिजली के बिलों को कम करने की पहल की है और यह सम्भव हो रहा है प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ता अपने घरों की छतों पर सोलर सन्यंत्र लगाकर सूर्य की किरणों से बनने वाली बिजली से अपने घरों में बिजली की निर्बाध रूप से आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। हालांकि सोलर पैनल के माध्यम से घरेलु और व्यवासायिक रूप से बिजली का उत्पादन कई वर्षों से हो रहा है। घरेलु उपयोग के लिये सौर ऊर्जा के उत्पादन पर केंद्र सरकार सब्सिडी देती है। कुछ राज्य सरकारें अपनी ओर से भी प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। लेकिन इस वर्ष 22 जनवरी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर में रामलला के विग्रह की प्राणपतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की घोषणा करते हुये कहा था कि इस योजना से भारत के एक करोड़ घरों में सोलर सन्यंत्रों से पैदा होने वाली बिजली से घरों में बिजली का बिल न्यूनतम हो जायेगा। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के शुरू होने के पहले तीन किलोवाट तक के सोलर पैनल लगवाने पर करीब 43000 रूपये सब्सिडी मिलती थी। अब इस योजना में सब्सिडी बढ़ाकर 78000 रूपये कर दी गई है। इस योजना की लोकप्रियता इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि योजना की घोषणा होने के करीब चार महीनों के भीतर ही एक करोड़ से अधिक उपभोक्ता आवेदन कर चुके थे।

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दरअसल, भारत में वर्ष में बरसात के दिनों को छोड़कर करीब – करीब नौ माह सूर्य की किरणें पर्याप्त मात्रा में रहती हैं। भारत में वर्तमान में सौर ऊर्जा से करीब 70 गीगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है जिसमें घरेलु सौर ऊर्जा सन्यंत्रों (रूफ टाप सोलर सन्यंत्र ) से उत्पादित बिजली का प्रतिशत काफी कम अर्थात केवल 11-12 गीगावाट ही है। सरकार ने सन 2026 तक घरेलु सौर ऊर्जा सन्यंत्रों से 40 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत एक रूफ टाप सोलर संस्थापित करने से इस लक्ष्य को हासिल करने में काफी मदद मिलेगी।

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घरेलु उपयोग के लिये ही सब्सिडी

रूफ टाप सोलर सन्यंत्र कोई भी उपभोक्ता अपने घरेलु अथवा व्यवसायिक उपयोग के लिये स्थापित करवा सकता है लेकिन सब्सिडी केवल घरेलु उपयोग के लिये स्थापित किये जाने वाले ही सोलर सन्यंत्रों पर मिलेगी। घरेलु अथवा व्यवसायिक उपयोग के लिये लगाये जाने वाले रूफ टाप सोलर सन्यंत्र के पूर्व यह भी जानना जरूरी है कि उपभोक्ता को कितने किलोवाट का सन्यंत्र लगवाना है। यदि उसके घर अथवा व्यवसायिक परिसर में बिजली का कनेक्शन कम किलोवाट का है तो सबसे पहले बिजली कम्पनी से उसकी क्षमता यानि जरूरत के मुताबिक किलोवाट स्वीकृत करवा लेना चाहिये। उदाहरण के लिये उपभोक्ता के घर में वर्तमान में 2 किलोवाट का कनेक्शन स्वीकृत है और वह तीन किलोवाट का रूफ टाप सोलर सन्यंत्र लगवाना चाहता है तो उसे सबसे पहले बिजली कम्पनी से अपने घर के कनेक्शन को तीन किलोवाट में परिवर्तन करवाना होगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करें। अभी वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा एक किलोवाट पर 30,000 रूपये, दो किलोवाट पर 60,000 रूपये और तीन किलोवाट पर 78,000 रूपये की सब्सिडी दी जा रही है। घरेलु उपयोग के लिये उपभोक्ता अधिकतम 10 किलोवाट तक रूफ तप सोलर सन्यंत्र स्थापित करवा सकता है लेकिन सब्सिडी अधिकतम 78,000 रूपये ही मिलेगी।

रूफ टाप सोलर सन्यंत्र की कीमत

भारत में रूफ टाप सोलर सन्यंत्र की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस कारण बड़ी संख्या में सोलर पैनल निर्माता के साथ इंवर्टर तथा अन्य सामान का उत्पादन करने वाली कम्पनियां भी बढ़ रही हैं। सोलर पैनल और उपकरणों की कामतें उनकी गुणवत्ता के अनुसार होती हैं इसलिये बाजार का सर्वेक्षण कर लेना उपयुक्त रहता है। आमतौर पर एक किलोवाट क्षमता के सन्यंत्र लगवाने का खर्च 45,000 रूपये से लेकर 70,000 रूपये तक आता है। यह अंतर सोलर पैनल, इंवर्टर, स्ट्रक्चर और अन्य सामान की गुणवत्ता के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है। सोलर सन्यंत्र लगवाते समय सन्यंत्र की तय राशि देनी होती है। सब्सिडी की राशि बाद में उपभोक्ता के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।

सोलर सन्यंत्र लगवाने की प्रक्रिया

वर्तमान में सोलर सन्यंत्र लगाने के लिये बड़ी संख्या में विक्रेता हैं लेकिन उसी विक्रेता से लगवाना उपयुक्त रहेगा जिसका पंजीयन बिजली कम्पनी अथवा नेशनल पोर्टल में है। विक्रेता का चुनाव और सन्यंत्र लगवाने की सेवा शर्तें पूरी करने के बाद नेशनल पोर्टल http://pmsuryaghar.gov.in पंजीयन करवाना होता है। आमतौर पर पंजीयन और बिजली कम्पनी से सम्बंधित सभी काम विक्रेता ही कर देते है। सभी जानकारी सही देनी चाहिये ताकि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी न हो। बैंक खाता नम्बर भी वही दें जिसमें सब्सिडी हस्तांतरित करवाना चाहते हैं। यदि उपभोक्ता सन्यंत्र लगवाने के लिये बैंक से ऋण लेना चाहते हैं तो 15 प्रतिशत मार्जिन राशि जमा करनी होगी। शेष राशि करीब 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर अधिसूचित बैंक से मिल जायेगी। पंजीयन स्वयं करें या किसी की मदद से कर रहे हैं अथवा विक्रेता से करवा रहे हैं तो पंजीयन के समय स्वयं भी उपस्थित रहें ताकि सभी जानकारियां सही दर्ज हो।

सोलर सन्यंत्र का रखरखाव (मेंटेनेंस)

आमतौर से भारत में जितने भी सोलर सन्यंत्र लगाये जा रहे हैं, सभी विक्रेता आश्वासन देते हैं कि सोलर सन्यंत्र से 25 साल तक बिजली पैदा होगी। विक्रेता सन्यंत्र के रखरखाव की पांच साल तक की जिम्मेदारी लेते हैं। बाद में वार्षिक अनुबंध भी कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण.. सोलर पैनलों की साफ सफाई सप्ताह में एक बार अवश्य करनी चाहिये। धूल जम जाने से बिजली का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पाईप से तेज पानी की धार से पैनल को साफ करना चाहिये। यदि हाथ से साफ कर रहे है तो हाथ में अंगूठी अथवा कड़ा नहीं पहनना चाहिये। अंगूठी या कड़े से खरोंच आ सकती है जिससे पैनल खराब हो सकता है। यदि कपड़े से साफ कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि कपड़े में कोई कंकड़ या रगड़ करने वाली वस्तु न हो। प्लास्टिक फाईबर के वाईपर से सफाई करने से बचना चाहिये क्योंकि फाईबर सख्त होता है जिससे पैनल पर रगड़ आने से खराब होने की सम्भावना होती है। पैनल को कभी भी गरम पानी से साफ नहीं करना चाहिये। पैनल साफ करने का सबसे उपयुक्त समय प्रात: जल्दी और शाम को सूरज ढलने के बाद ही रहता है।

रूफ टाप सोलर सन्यंत्र पर होने वाले खर्च का समायोजन करीब – करीब पांच साल में हो जाता है। उसके बाद अगले 20 से अधिक वर्षों तक बिजली के बिल से राहत मिलेगी। केवल बिजली कम्पनी द्वारा निर्धारित तय (फिक्स्ड) राशि और अधिक उपयोग की गई बिजली का ही भुगतान करना होगा। पीएम सूर्य घर योजना निश्चित ही उपभोक्ताओं के लिये फायदेमंद है। इस योजना का लाभ उठाकर तापीय बिजली की जरूरत को थोड़ा कम कर सकते हैं। यह पर्यावरण को स्वच्छ रखने में हमारी भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

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