सोयाबीन मील की कमी भारत के 30 अरब डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य के लिए चुनौती
13 जून 2026, मुंबई: सोयाबीन मील की कमी भारत के 30 अरब डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य के लिए चुनौती – कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CLFMA) ने सोयाबीन मील (SBM) की बढ़ती कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। एसबीएम पशु आहार में उपयोग होने वाला एक प्रमुख प्रोटीन स्रोत है और इसकी कीमतों में हाल के सप्ताहों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 65-66 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जिससे पशु आहार उत्पादन की लागत बढ़ रही है और पोल्ट्री, जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) तथा पशुपालन क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है।
सीएलएफएमए के अनुसार, सोयाबीन मील संतुलित पशु आहार का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता और किसानों की आय में अहम भूमिका निभाता है। इसकी उपलब्धता में कमी और बढ़ती कीमतें फीड निर्माताओं तथा किसानों दोनों के लिए चुनौती बन रही हैं, जिससे भारत की पशु-आधारित खाद्य श्रृंखला की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
यह चिंता विशेष रूप से एक्वाकल्चर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कुल उत्पादन लागत का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा केवल फीड पर खर्च होता है। भारत वैश्विक समुद्री खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में गुणवत्तापूर्ण और किफायती फीड सामग्री की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक हो गई है।
सीएलएफएमए की अध्यक्ष दिव्या कुमार गुलाटी ने कहा, “भारत के पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पशुपालन क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। यदि सोयाबीन मील की कमी और फीड लागत में वृद्धि लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर किसानों की उत्पादकता और लाभप्रदता पर पड़ेगा। भारत यदि समुद्री खाद्य निर्यात में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है, तो उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती फीड अवयवों की उपलब्धता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना होगा। उद्योग, नीति-निर्माताओं और किसानों को मिलकर एक दीर्घकालिक समाधान विकसित करना चाहिए, जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो और पशु आहार उद्योग मजबूत बने।”
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि भारत सरकार समुद्री खाद्य निर्यात को अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत में समुद्री खाद्य निर्यात को वर्तमान स्तर से लगभग ढाई गुना बढ़ाने की क्षमता है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक मजबूत और स्थिर फीड आपूर्ति प्रणाली की आवश्यकता होगी, जो उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को लगातार समर्थन दे सके।
फीड उद्योग के शीर्ष संगठन के रूप में सीएलएफएमए का मानना है कि सोयाबीन मील की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसानों को समर्थन देने के लिए समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस चुनौती से निपटने के लिए सीएलएफएमए ने कई सुझाव दिए हैं। इनमें घरेलू फीड उद्योग के लिए सोयाबीन मील की संतुलित उपलब्धता सुनिश्चित करना, साथ ही सोयाबीन उत्पादकों के हितों की रक्षा करना शामिल है। संगठन ने सोयाबीन प्रसंस्करण और मूल्य श्रृंखला अवसंरचना में निवेश बढ़ाने, नीति-निर्माताओं, किसान संगठनों, प्रोसेसरों और फीड निर्माताओं के बीच सहयोग मजबूत करने तथा प्रोटीन सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने की भी सिफारिश की है। इसके अलावा, सोयाबीन मील की उपलब्धता और कीमतों में उतार-चढ़ाव की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
सीएलएफएमए का मानना है कि आज फीड सुरक्षा सुनिश्चित करना ही भविष्य में भारत के पशुपालन, जलीय कृषि, निर्यात वृद्धि और पोषण सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने की मजबूत नींव साबित होगा।
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