2025 में पिस्ता की कीमतों में तेज़ उछाल, कोकोआ और कॉफी को भी पीछे छोड़ गया
19 नवंबर 2025, दुबई: 2025 में पिस्ता की कीमतों में तेज़ उछाल, कोकोआ और कॉफी को भी पीछे छोड़ गया – पिछले एक वर्ष में पिस्ता की कीमतों में जिस गति से बढ़ोतरी हुई है, उसने वैश्विक खाद्य बाज़ार को चौंका दिया है। पिस्ता की कीमतें लगभग 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं और इस तेज़ी ने कोकोआ और कॉफी जैसे पारंपरिक रूप से अस्थिर माने जाने वाले बाज़ारों को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्षों से कोकोआ और कॉफी ही वे कमोडिटी थीं जिनमें मौसम, जलवायु परिवर्तन और मांग में उतार-चढ़ाव के कारण सबसे तेज़ मूल्य वृद्धि देखी जाती थी, लेकिन अब पिस्ता ने दोनों की जगह लेते हुए बाज़ार पर अपना दबदबा जमा लिया है। यह बदलाव केवल स्वाद के रुझानों का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में हो रहे बड़े परिवर्तन का संकेत भी है।
मांग में तेज़ उछाल, लेकिन आपूर्ति पीछे रह गई
पिस्ता की कीमतें इसलिए तेजी से चढ़ रही हैं क्योंकि दुनिया भर में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन इसकी बराबरी नहीं कर पा रहा है। अमेरिका, जो दुनिया के सबसे बड़े पिस्ता उत्पादकों में से एक है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अप्रैल 2025 तक अमेरिका की वर्ष 2024 की लगभग पूरी पिस्ता फसल बिक चुकी थी, जबकि यह आमतौर पर पूरे वर्ष धीरे-धीरे बिकती है। इतनी जल्दी पूरा उत्पादन बिक जाना इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय चॉकलेट कंपनियां, बेकरी, आइसक्रीम ब्रांड और कैफे चेन इसकी आपूर्ति को पहले से ही सुरक्षित कर लेना चाहती हैं।
इसके अलावा, दुबई से शुरू हुआ पिस्ता-आधारित मिठाइयों का ट्रेंड तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और फिर यूरोप, अमेरिका और एशिया के प्रीमियम बेकरी और चॉकलेट बाज़ारों में फैल गया। उपभोक्ताओं की बढ़ती दिलचस्पी के कारण मांग उस गति से बढ़ी, जिसे पूरा करने के लिए उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता पर्याप्त नहीं थी। यही मांग और सीमित आपूर्ति का टकराव कीमतों को लगातार ऊपर ले जा रहा है।
पिस्ता की खेती भी तेजी से विस्तार की अनुमति नहीं देती। यह फसल विशेष प्रकार की जलवायु, पर्याप्त सिंचाई और लंबी उत्पादक अवधि की मांग करती है। बढ़ते क्षेत्र के बावजूद मौसम की अनिश्चितता और पानी की कमी जैसी चुनौतियाँ उत्पादन क्षमता को सीमित कर रही हैं, जिससे आपूर्ति लगातार पीछे छूट रही है।
खाद्य उद्योग के लिए नई चुनौती, लागत बढ़ने का दबाव
पिस्ता की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक खाद्य और पेय उद्योग पर सीधा असर डाला है। प्रीमियम चॉकलेट निर्माता अपनी रेसिपी में बदलाव कर रहे हैं, कैफे लागत और मार्जिन को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं और आर्टिजन आइसक्रीम और पेस्ट्री बनाने वाले ब्रांड इस बढ़ी हुई लागत को झेलकर भी पिस्ता उत्पादों को मेन्यू में बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह फ्लेवर अब केवल एक प्रीमियम विकल्प नहीं रहा, बल्कि एक आवश्यक घटक बन गया है जिसे उपभोक्ता हर जगह मांग रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिस्ता की कीमतों में यह वृद्धि किसी एक खराब फसल या किसी अस्थायी व्यवधान का परिणाम नहीं है। यह एक संरचनात्मक परिवर्तन है, जहां विश्वभर में पिस्ता की लोकप्रियता और खपत उसकी उत्पादन क्षमता से कहीं आगे निकल चुकी है। इसके विपरीत, कोकोआ और कॉफी जैसे पारंपरिक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद एक लंबा अनुभवजन्य आधार मौजूद है, लेकिन पिस्ता उद्योग इतनी तेज़ रफ्तार वाले परिवर्तन का सामना पहली बार कर रहा है।
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