राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में कृषि भूमि में जैविक कार्बन: मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए सरकार के बड़े कदम

19 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: भारत में कृषि भूमि में जैविक कार्बन: मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए सरकार के बड़े कदम – कृषि भूमि में जैविक कार्बन की कमी भारतीय कृषि के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। जैविक कार्बन की कमी से मिट्टी की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। इसे सुधारने के लिए सरकार मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) योजना सहित कई कदम उठा रही है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता का नियमित मूल्यांकन किया जाता है। योजना के तहत, प्रत्येक तीन साल में मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाते हैं। अब तक 24.60 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जा चुके हैं।

जैविक कार्बन की कमी के कारण

मिट्टी में जैविक कार्बन में कमी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

    1. दोषपूर्ण प्रथाएं: रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक या अविवेकपूर्ण उपयोग, बार-बार जुताई, ठूंठ जलाना, अतिचारण, और कटाव।
    2. फसल प्रणाली में असंतुलन: बारहमासी वनस्पतियों की जगह एकल फसल और चारागाह उगाना।
    3. मिट्टी के भौतिक-रासायनिक गुण: जैसे उच्च बजरी सामग्री, मिट्टी का कटाव, और नमी संरक्षण उपायों की कमी।

    सरकार की योजनाएं और पहल

    मिट्टी की उर्वरता और जैविक कार्बन में सुधार के लिए सरकार ने कई योजनाओं को लागू किया है।

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    1. मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता योजना

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    यह योजना मृदा में जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की मात्रा की जानकारी देने के साथ किसानों को जैविक खादों और जैव-उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह देती है। रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की सिफारिश की जाती है।

    2. जैविक खेती को बढ़ावा

    सरकार परम्परागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (एमओवीसीडीएनईआर) के तहत जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इन योजनाओं के तहत किसानों को तीन साल की अवधि के लिए 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है।

    3. राष्ट्रीय मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ)

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेतों पर बनी प्राकृतिक खेती जैव-इनपुट्स के उपयोग, बायोमास मल्चिंग, बहु-फसल प्रणाली, और मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार लाने वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए एनएमएनएफ को मंजूरी दी है।

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    4. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उपाय

    आईसीएआर ने विभिन्न स्थान-विशिष्ट जैव-इंजीनियरिंग उपाय विकसित किए हैं, जैसे: वर्षा जल के बहाव से मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए उपाय, हवा के कटाव को रोकने के लिए रेत के टीलों को स्थिर करना और आश्रय बेल्ट तकनीक और समस्याग्रस्त मिट्टी के लिए सुधार तकनीक।

    जैविक खेती पर नेटवर्क परियोजना (एनपीओएफ)

    आईसीएआर 16 राज्यों में 20 केंद्रों के माध्यम से एनपीओएफ लागू कर रहा है। इसके तहत 68 स्थान-विशिष्ट जैविक खेती पैकेज विकसित किए गए हैं, जिन्हें विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है।

    यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री राम नाथ ठाकुर ने लोकसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।

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