प्राकृतिक खेती से कृषि में रोजगार वृद्धि  सहित व्यापक फायदे होंगे – श्री तोमर

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नवोन्वेषी कृषि” पर राष्ट्रीय कार्यशाला

25 अप्रैल 2022, नई दिल्ली । प्राकृतिक खेती से कृषि में रोजगार वृद्धि  सहित व्यापक फायदे होंगे – श्री तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी अभियान प्रारंभ किया है और इस दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भी मिशन मोड में कार्य करने जा रहा है। कृषि संबंधी पाठ्यक्रमों में भी प्राकृतिक खेती का विषय शामिल करने को लेकर बनाई गई समिति ने भी काम शुरू कर दिया है। श्री तोमर ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमारा प्रकृति के साथ तालमेल बढ़ेगा, जिसके कृषि क्षेत्र में- गांवों में ही रोजगार बढ़ने सहित देश को व्यापक फायदे होंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने यह बात आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में नीति आयोग द्वारा नवोन्वेषी कृषि विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कही। कार्यशाला में गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत भी शामिल हुए, वहीं केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन व डेयरी मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला वर्चुअल जुड़े थे। तकनीकी सत्रों में उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रमुख कृषि विशेषज्ञों ने उद्बोधन दिया।

श्री तोमर ने कहा कि यह हमारी देशी प्राचीन पद्धति ही है, जिसमें खेती की लागत कम आती है और प्राकृतिक संतुलन स्थापित होने से किसानों को फायदा पहुंचता है। प्राकृतिक खेती रसायनमुक्त व पशुधन आधारित है, जिससे लागत में कमी के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि व स्थिर पैदावार होगी तथा पर्यावरण व मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय द्वारा भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) की उप-योजना के माध्यम से किसानों को प्रेरित-प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ रहा है, जो अभी लगभग चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच चुका है।

केंद्रीय मंत्री श्री रूपाला ने कहा कि  कोरोना के कारण लोगों के खान-पान में बदलाव आ रहा है और आर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिसकी पूर्ति के लिए संज्ञान लिया जाना चाहिए। आपने  ने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हमें अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिला है। यह पद्धति भारत को विश्व में अग्रणी बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

गुजरात के राज्यपाल श्री देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती में पौधे को पानी नहीं, बल्कि नमी चाहिए होती है। इस पद्धति में पहले साल लगभग 50 प्रतिशत पानी कम लगता है और तीसरे साल तक लगभग सत्तर प्रतिशत पानी की बचत होने लगती है।

प्रारंभ में, नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार (कृषि) डॉ. नीलम पटेल ने स्वागत भाषण दिया। नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत व सदस्य प्रो. रमेश चंद ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सफलता की कहानियों (हिंदी व अंग्रेजी) के संग्रह और प्राकृतिक खेती का अभ्यास करने वाले किसानों के वीडियो का विमोचन भी किया गया। आयोग के निवृत्तमान उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार भी उपस्थित थे।

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