राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सतत कृषि विकास में महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय मंथन, पूसा सम्मेलन में जारी हुआ भविष्य का रोडमैप

01 जुलाई 2026, नई दिल्ली: सतत कृषि विकास में महिलाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय मंथन, पूसा सम्मेलन में जारी हुआ भविष्य का रोडमैप – डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए विस्तार रणनीतियाँ” का सोमवार को विद्यापति सभागार में समापन हो गया। समापन सत्र में सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशें जारी की गईं तथा लिंग-संवेदी कृषि प्रसार सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

यह सम्मेलन 27 से 29 जून तक डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय तथा इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य कृषि और खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को नई दृष्टि से समझना, उनके योगदान को नीति निर्माण में उचित स्थान दिलाना तथा कृषि प्रसार सेवाओं को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना था।

सम्मेलन में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा पूर्वोत्तर राज्यों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्माता, प्रसार विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधार्थी और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। तीन दिनों तक चले इस राष्ट्रीय मंथन में कृषि विकास, महिला सशक्तिकरण और तकनीकी नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।

इस दौरान 12 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें कृषि प्रसार, जलवायु परिवर्तन, महिला नेतृत्व, डिजिटल कृषि, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, किसान उत्पादक संगठनों में महिलाओं की भागीदारी तथा आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में 86 शोध-पत्र, 48 पोस्टर प्रस्तुतियां और कई विशेषज्ञ पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिनमें कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और संभावित समाधानों पर व्यापक मंथन किया गया।

समापन सत्र में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका केवल श्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वे निर्णय लेने, नवाचार अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इसलिए कृषि नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रसार सेवाओं में महिलाओं की आवश्यकताओं और भागीदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशों में महिला किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों की आसान पहुंच, डिजिटल कृषि सेवाओं का विस्तार, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, महिला किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों के व्यापक प्रसार पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, कृषि अनुसंधान और विस्तार कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा लिंग-संवेदी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि सतत कृषि विकास का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब महिला किसानों को समान अवसर, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिले। पूसा में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने महिला-केंद्रित कृषि विकास के लिए भविष्य की रणनीति और कार्ययोजना को नई दिशा प्रदान की।

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