नाबार्ड ने लॉन्च की नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज, क्लाइमेट फोरकास्टिंग सॉल्यूशन्स के लिए ₹15 लाख का शीर्ष पुरस्कार
09 मार्च 2026, नई दिल्ली: नाबार्ड ने लॉन्च की नेशनल क्लाइमेट स्टैक इनोवेशन चैलेंज, क्लाइमेट फोरकास्टिंग सॉल्यूशन्स के लिए ₹15 लाख का शीर्ष पुरस्कार – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और डालबर्ग एडवाइजर्स के सहयोग से राष्ट्रीय जलवायु स्टैक नवाचार चुनौती की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य भारत में कृषि और ग्रामीण आजीविका को जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बढ़ते जोखिमों के प्रति अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाना है। इस चुनौती के लिए आवेदन 6 मार्च 2026 से शुरू हो गए हैं।
इस पहल के तहत शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों, नवप्रवर्तकों और नवउद्यमों को आमंत्रित किया गया है कि वे निकट अवधि (10 से 15 वर्ष) के लिए जलवायु जोखिम पूर्वानुमान मॉडल तथा व्यावहारिक डैशबोर्ड विकसित करें। इन समाधानों का उद्देश्य कृषि, ग्रामीण वित्त और सार्वजनिक योजना से जुड़े निर्णयों के लिए उपयोगी जलवायु आधारित सूचना प्रणाली तैयार करना है।
भारत में हाल के वर्षों में लू, बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी चरम मौसमीय घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि जलवायु संबंधी आंकड़ों की उपलब्धता में वृद्धि हुई है, लेकिन ये आंकड़े विभिन्न मंचों और प्रणालियों में बिखरे हुए हैं। इसके कारण निकट अवधि के जलवायु जोखिमों का सटीक पूर्वानुमान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। मौजूदा जोखिम प्रबंधन प्रणालियाँ अक्सर घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने तक ही सीमित रहती हैं, जबकि आवश्यकता ऐसी प्रणालियों की है जो पहले से संभावित जोखिमों का आकलन कर सकें।
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. जी. आर. चिंतला ने कहा कि देश में जलवायु संबंधी आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण में काफी प्रगति हुई है, लेकिन यह जानकारी अलग-अलग मंचों पर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि यह नवाचार चुनौती देश के श्रेष्ठ विशेषज्ञों और नवाचारकर्ताओं को एक साथ लाकर ऐसा समाधान विकसित करने का प्रयास है, जो विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जलवायु आंकड़ों को एकीकृत कर सके और उन्हें व्यापक रूप से उपयोग के लिए उपलब्ध करा सके।
इस चुनौती का उद्देश्य भारत के वैज्ञानिक और नवाचार तंत्र को राष्ट्रीय जलवायु स्टैक के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत ऐसे प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं जो विश्वसनीय जलवायु जोखिम पूर्वानुमान ढांचा तैयार कर सकें तथा उसके आधार पर उपयोगी डैशबोर्ड विकसित कर सकें। इन प्रयासों का लक्ष्य केवल आंकड़ों के संग्रह तक सीमित न रहकर उन्हें व्यावहारिक निर्णयों के लिए उपयोगी बनाना है।
यह प्रतियोगिता कई चरणों में आयोजित की जाएगी। सबसे पहले राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा कर संभावित टीमों का चयन किया जाएगा। चयनित टीमों को लगभग 6 से 8 सप्ताह की विकास प्रक्रिया में अपने मॉडल को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में और बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। अंतिम चरण में तकनीकी मूल्यांकन और निर्णायक मंडल की समीक्षा के आधार पर मई से जून 2026 के बीच विजेताओं का चयन किया जाएगा।
प्रस्तावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक मजबूती, स्पष्टता, व्यावहारिक उपयोगिता, पारस्परिक समन्वय क्षमता और विस्तार की संभावनाओं जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा, ताकि चयनित समाधान वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी रूप से लागू किए जा सकें।
यह पहल नाबार्ड के जलवायु अनुकूल कृषि हेतु आंकड़ा मंच से जुड़ी है, जिसके माध्यम से जलवायु आधारित कृषि समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस चुनौती के माध्यम से नाबार्ड का लक्ष्य इस मंच को आगे बढ़ाकर ऐसी डिजिटल सार्वजनिक संरचना में परिवर्तित करना है, जो भविष्य में जलवायु पूर्वानुमान और निर्णय समर्थन प्रणालियों को मजबूत आधार प्रदान कर सके।
इस प्रतियोगिता में शीर्ष तीन टीमों को क्रमशः 15 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 5 लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। चयनित समाधानों को आगे चलकर नाबार्ड और उसके सहयोगी कार्यक्रमों के माध्यम से परीक्षण परियोजनाओं के रूप में लागू करने और व्यापक स्तर पर अपनाने की संभावना भी होगी।
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