मिडिल ईस्ट की जंग का भारत की खेती पर नहीं पड़ेगा असर, सरकार ने खाद के लिए वैकल्पिक स्रोत खोजने की तैयारी तेज की- कृषि आयुक्त
13 मार्च 2026, नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट की जंग का भारत की खेती पर नहीं पड़ेगा असर, सरकार ने खाद के लिए वैकल्पिक स्रोत खोजने की तैयारी तेज की- कृषि आयुक्त – भू‑राजनीतिक तनाव, जैसे ईरान‑इजराइल और अमेरिका‑ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए भारत सरकार ने खाद और उर्वरकों के कच्चे माल की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह के मुताबिक, भारत में वर्तमान में उर्वरकों की उपलब्धता फिलहाल सामान्य है और किसानों को सप्लाई में कोई बाधा नहीं आई है। लेकिन अगर क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है तो आयात प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए सरकार वैकल्पिक देशों से उर्वरक और जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति के विकल्प तलाश रही है। इसमें रॉक फॉस्फेट, सल्फर और यूरिया जैसी महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल हैं।
भारत 40% उर्वरक पश्चिम एशिया से करता है आयात
उर्वरक और खाद के कच्चे माल के लिए देश पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है। दरअसल, भारत अपने उर्वरक आयात का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के देशों से प्राप्त करता है। भारत में उपयोग होने वाली यूरिया व फॉस्फेटिक उर्वरकों का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से आता है। इसके अलावा, रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड भी बड़ी मात्रा में पश्चिम एशिया से आयात होता है। ऐसे में अगर भू‑राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने का खतरा रह सकता है।
LNG सप्लाई पर कोई चिंता नहीं
कृषि आयुक्त ने यह भी बताया कि देश में यूरिया का उत्पादन पर्याप्त स्तर पर हो रहा है, जिससे यदि आयात में किसी कारण से व्यवधान आता भी है, तो घरेलू उत्पादन सप्लाई को संतुलित रखने में सहायक होगा। उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की उपलब्धता फिलहाल सुरक्षित है, और लंबी अवधि के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है।
किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग करने की अपील की
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि उर्वरकों का संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग करें। यदि किसान फसलों के लिए अनुशंसित मात्रा का पालन करेंगे, तो उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि देश में मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जिससे पोषक तत्वों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। कृषि विभाग ने सिंचाई प्रबंधन, वाटरशेड प्रबंधन और प्राकृतिक खेती मिशन को मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए हैं।
कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने अंत में कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत का कृषि निर्यात सामान्य है। देश से इस क्षेत्र में विशेषकर बासमती चावल का निर्यात पहले ही बड़े पैमाने पर हो चुका है और मांग में कमी के संकेत नहीं हैं।
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