कृषि मंत्रालय की पहली मासिक समीक्षा बैठक में बड़ा एलान, 22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”
08 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: कृषि मंत्रालय की पहली मासिक समीक्षा बैठक में बड़ा एलान, 22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान” – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने इस हफ्ते अपनी पहली व्यापक मासिक समीक्षा बैठक की, जिसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर से देशभर में “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने का एलान किया। सोमवार को कृषि भवन में हुई इस बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्र समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
चौहान ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ उत्पादन के आंकड़े बढ़ाना नहीं है, बल्कि विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म करना और किसानों को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मौके देना है। उनके मुताबिक अब हर योजना का मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि उससे किसान की जेब में कितना फायदा पहुंचा।
मिट्टी और पराली पर केंद्रित होगा अभियान
मंत्रालय के मुताबिक यह राष्ट्रव्यापी अभियान तीन मुद्दों पर केंद्रित रहेगा- मिट्टी की सेहत में आ रही गिरावट, पराली प्रबंधन की चुनौतियां और रासायनिक खादों का असंतुलित इस्तेमाल। 22 अक्टूबर से शुरू होकर यह अभियान आने वाले हफ्तों तक चलेगा, जिसमें राज्य सरकारों की भी भागीदारी रहेगी।
इस दौरान कृषि वैज्ञानिक और क्षेत्रीय कर्मचारी सीधे खेतों पर पहुंचकर किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित खाद इस्तेमाल और फसल अवशेष के वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देंगे। पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटने की शिकायतें कई राज्यों से लगातार आती रही हैं, जिसे देखते हुए मंत्रालय इस अभियान को प्राथमिकता दे रहा है।
डिजिटल पहचान और फसल बीमा में प्रगति
बैठक में बताया गया कि डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक 10.77 करोड़ किसानों की यूनीक फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। मंत्रालय का लक्ष्य करीब 14 करोड़ किसानों को इस दायरे में लाना है।
यह डिजिटल पहचान सब्सिडी, कर्ज, एमएसपी पर खरीद, फसल बीमा और आपदा राहत जैसी योजनाओं का लाभ सीधे किसान के बैंक खाते तक पहुंचाने के काम आती है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने और भुगतान में देरी घटने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि फसल बीमा योजना में किसानों के पंजीयन में इस साल 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसके अलावा दालों और तिलहनों के उत्पादन में राष्ट्रीय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन रहा है, जबकि प्राकृतिक खेती के दायरे में भी बड़ा विस्तार देखा गया है।
चौहान ने बैठक में कहा कि खेतों को बचाना केवल आज की उपज से नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पोषण सुरक्षा से जुड़ा मसला है। उन्होंने अधिकारियों को राज्य सरकारों के साथ मिलकर अभियान की लंबी अवधि की योजना बनाने के निर्देश दिए।
मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अब हर महीने इस तरह की समीक्षा बैठकें नियमित रूप से की जाएंगी, जिससे योजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके और जमीनी स्तर की दिक्कतों को समय पर दूर किया जा सके। कृषि मंत्रालय की यह पहली मासिक समीक्षा खरीफ सीजन खत्म होने और रबी की बुवाई शुरू होने के बीच के समय पर हुई है, जब देश के ज्यादातर हिस्सों में किसान गेहूं, चना और सरसों की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं।
कृषि मंत्रालय के इस कदम को प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की पिछले कुछ समय से चल रही कोशिशों की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। मंत्रालय पहले भी दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता तथा डिजिटल कृषि मिशन को लेकर अलग-अलग मौकों पर इसी तरह के लक्ष्य दोहरा चुका है।
अधिकारियों के मुताबिक आने वाले महीनों में हर मासिक समीक्षा बैठक में राज्यवार खेत बचाओ अभियान की तैयारियों और डिजिटल कृषि मिशन की रफ्तार पर अलग से नजर रखी जाएगी।
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