गेहूं के सीमित निर्यात को मंजूरी: मजबूत भंडार और बेहतर रबी परिदृश्य के बीच भारत का संतुलित कदम
15 फरवरी 2026, इंदौर / नई दिल्ली: गेहूं के सीमित निर्यात को मंजूरी: मजबूत भंडार और बेहतर रबी परिदृश्य के बीच भारत का संतुलित कदम – करीब चार वर्षों के प्रतिबंध के बाद भारत सरकार ने नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं तथा 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी है। यह निर्णय किसान संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं की लगातार उठ रही मांग के बाद लिया गया है, जो बढ़ती घरेलू उपलब्धता और अधिक आवक के समय कीमतों में गिरावट की आशंका को लेकर चिंतित थे।
निर्यात नियंत्रण के वर्षों बाद नीतिगत बदलाव
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना और घरेलू बाजार में संतुलन बनाए रखना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्यात की अनुमति सीमित मात्रा में दी गई है ताकि देश की खाद्य सुरक्षा पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े। इसे पूर्ण उदारीकरण के बजाय एक सावधानीपूर्वक पुनःप्रवेश के रूप में देखा जा रहा है।
पर्याप्त घरेलू भंडार से बढ़ा भरोसा
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब देश में गेहूं की उपलब्धता उल्लेखनीय रूप से बेहतर हुई है। वर्ष 2025–26 में निजी क्षेत्र के पास लगभग 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का भंडार उपलब्ध होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 32 लाख मीट्रिक टन अधिक है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकारी खरीद प्रणाली के बाहर भी बाजार में पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है।
इसी के साथ भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में गेहूं का भंडार भी मजबूत बना हुआ है। 1 अप्रैल 2026 तक केंद्रीय भंडार लगभग 182 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो बफर मानकों से काफी अधिक है। पर्याप्त स्टॉक को देखते हुए सरकार का मानना है कि सीमित निर्यात से न तो घरेलू आपूर्ति प्रभावित होगी और न ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर दबाव पड़ेगा।
बढ़ा रकबा, मजबूत उत्पादन की उम्मीद
रबी 2026 में गेहूं का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। बुवाई क्षेत्र में यह वृद्धि और अब तक अनुकूल फसल परिस्थितियों ने बेहतर उत्पादन की उम्मीद को मजबूत किया है। ऐसे परिदृश्य में निर्यात की अनुमति को अतिरिक्त उत्पादन को समाहित करने और अधिक आवक के समय कीमतों में गिरावट को रोकने के उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
2022 के प्रतिबंध से वैश्विक बाजार में संतुलित वापसी तक
मई 2022 में भीषण गर्मी के कारण उत्पादन प्रभावित होने और घरेलू उपलब्धता घटने की आशंका के चलते भारत ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसी समय रूस–यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में तेज उछाल आया। घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उस समय निर्यात पर रोक आवश्यक मानी गई थी।
वर्तमान परिस्थितियां उससे भिन्न हैं। बेहतर उत्पादन संभावना, पर्याप्त भंडार और अपेक्षाकृत स्थिर मूल्य स्थिति के बीच सरकार ने नियंत्रित मात्रा में निर्यात की अनुमति देकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। यह कदम किसानों के हित, मुद्रास्फीति प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, साथ ही भारत को वैश्विक गेहूं बाजार में सीमित रूप से पुनः सक्रिय करने की दिशा में भी संकेत देता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय घरेलू आपूर्ति और उत्पादन को लेकर नीति-निर्माताओं के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। आने वाले महीनों में अंतिम उत्पादन अनुमान, खरीद की स्थिति और मूल्य प्रवृत्तियां तय करेंगी कि क्या भविष्य में निर्यात पर और ढील दी जाएगी।
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