आईटीसी द्वारा कृषि लागत कम करने ,उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यापक पैमाने पर पीपीपी और तकनीकी गठजोड़ किए

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10 अगस्त 2021, नई दिल्ली ईटीसी द्वारा कृषि लागत कम करने ,उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यापक पैमाने पर  पीपीपी और तकनीकी गठजोड़ किए – भारत के प्रमुख मल्टी-बिजनेस समूहों में से एक आईटीसी लिमिटेड अपने सामुदायिक विकास कार्यक्रमों को तेजी से बढ़ाने के लिए हितधारकों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत कर रही है। कंपनी ने कई राज्य सरकारों और सरकारी निकायों के साथ 83 सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), राष्ट्रीय व वैश्विक संगठनों के साथ 24 तकनीकी सहयोग स्थापित किए हैं और ग्राम-आधारित संस्थानों के विषयगत विशेषज्ञों व अन्य साझेदारियों के अलावा 82 बेस्ट-इन-क्लास गैर सरकारी संगठनों के साथ काम कर रही है।

  • विभिन्न राज्य सरकारों , नाबार्ड, सरकारी उपक्रमों के साथ 83 पीपीपी स्थापित किए और राष्ट्रीय – वैश्विक संगठनों के साथ 24 तकनीकी गठजोड़ किए
  • 2020-21 में विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मृदा संरक्षण और शिक्षा के लिए छह समझौते किए
  • 82 बेस्ट-इन-क्लास एनजीओ और विषय विशेषज्ञों के साथ जुड़कर  1.64 लाख सदस्यों के 10,524 यूजर ग्रुप बनाए
  • 8 राज्यों में 27 आकांक्षी जिलो में नीति आयोग के साथ मिलकर  25 लाख किसानों को कवर किया 

आईटीसी 8 राज्यों के 27 आकांक्षी जिलों में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सुधार के लिए नीति आयोग के साथ भी काम कर रही है और अब तक 25 लाख किसानों को कवर कर चुकी है। कंपनी ने कई राज्यों में अहम कृषि पद्धतियों को संस्थागत रूप दिया है, जिनका उद्देश्य खेती की लागत को कम करना और उत्पादकता में सुधार करना है।

राज्य सरकारों और नाबार्ड के साथ आईटीसी की साझेदारी जल प्रबंधन, कृषि, जैव विविधता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, महिला सशक्तीकरण, पशुधन, समेत विभिन्न क्षेत्रों में है। आईटीसी ने 2020-21 के दौरान मृदा व नमी संरक्षण और शिक्षा के लिए विभिन्न राज्य सरकारों के साथ छह साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन साझेदारियों ने आईटीसी के सोशल इंवेस्टमेंट प्रोग्राम को 2020-21 में 81.76 करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया।

अपने सीएसआर कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए कंपनी के दृष्टिकोण पर आईटीसी लिमिटेड के कार्यकारी उपाध्यक्ष और सोशल इंवेस्टमेंट हेड डॉ. अशेष अंबस्ता ने कहा, “विकास के रास्ते की चुनौतियों को देखते हुए आईटीसी सामाजिक विकास में तेजी लाने के लिए सहयोग की शक्ति में विश्वास करती है, जिससे गहरा और स्थायी प्रभाव पैदा होता है। इसी के अनुरूप, मल्टी-स्टेकहोल्डर पार्टनरशिप आईटीसी के मिशन सुनहरा कल के मूल में हैं।”

वाटरशेड विकास

2020-21 में, कंपनी ने झालावाड़ और हिंडोली जिले में वाटरशेड विकास पर आधारित स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी जल संचय योजना (आरजीजेएसवाई) के तहत राजस्थान सरकार के साथ दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिनसे क्रमशः 37,295 एकड़ और 10,657 एकड़ क्षेत्र को लाभ हुआ। कंपनी ने पूरे मुंगेर जिले में अहार व पाइन सिस्टम के पुनरुद्धार के लिए जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए), बिहार और पूरे राज्य को कवर करने वाले 29 जिलों में वाटरशेड के सूखा-प्रूफिंग के लिए कर्नाटक के वाटरशेड विकास विभाग के साथ भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से बिहार में 1.07 लाख एकड़ और कर्नाटक में 1.12 लाख एकड़ को फायदा होगा।

जलवायु परिवर्तन

अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान के लिए सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ आईटीसी की तकनीकी व नॉलेज पार्टरनशिप का उद्देश्य आईटीसी के मिशन सुनहरा कल (एमएसके) प्रोजेक्ट गांवों के रेजिलिएंस में सुधार करना और जलवायु परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों को कम करने के लिए किसानों को तैयार करना है। इन साझेदारियों में क्लाइमेट-स्मार्ट विलेज (सीएसवी) और जलवायु जोखिम मूल्यांकन (क्लाइमेट रिस्क असेसमेंट) पहल के तहत 14 राज्यों के 1,618 गांवों के किसान शामिल हैं।

जल उपयोग दक्षता

कंपनी इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के साथ अपनी साझेदारी के तहत प्रकृति की प्रमुख इकोसिस्टम सर्विसेज के पुनरुद्धार की दिशा में काम कर रही है, जबकि सूखा-प्रूफ कृषि जलग्रहण (एग्रीकल्चरल कैचमेंट) के लिए टेम्पलेट विकसित कर रही है और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) के साथ अपने गठजोड़ के तौर पर फैक्ट्री कैचमेंट में यूनिट वाटर सिक्योरिटी प्राप्त कर रही है। कंपनी ने नदी बेसिन जल पहल और बेहतर कपास पहल के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के साथ सूखा प्रूफिंग टेम्पलेट विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) के साथ और केले, नारियल और गन्ने की फसल में जल उपयोग दक्षता के लिए तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय और वसंत दादा चीनी संस्थान के साथ भागीदारी की है।

सामुदायिक भागीदारी

गैर सरकारी संगठनों और विषयगत विशेषज्ञों के साथ आईटीसी की साझेदारी इसे सशक्त समुदाय-आधारित (कम्युनिटी बेस्ड) संगठन बनाने में मदद कर रही है। ये साझेदारियां स्वायत्त रूप से कार्य कर सकती हैं और आईटीसी मिशन सुनहरा कल (एमएसके) कार्यक्रम के तहत कंपनी द्वारा कार्यान्वित 139 परियोजनाओं के क्रियान्वयन  में सामुदायिक भागीदारी भी कर सकती हैं। मिशन सुनहरा कल विकास मॉडल के तहत आईटीसी के सामुदायिक विकास के कदम जल प्रबंधन, सामाजिक वानिकी, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा में सुधार एवं कौशल और स्वास्थ्य व स्वच्छता में सुधार के क्षेत्रों में उठाए गए हैं। कंपनी ने अब तक 22.22 करोड़ रुपये के कॉर्पस फंड के साथ 1.64 लाख सदस्यों के 10,524 यूजर ग्रुप बनाए हैं। कंपनी ने परियोजनाओं की नब्ज परखने और फीडबैक व फॉरवर्ड प्लानिंग के लिए एनजीओ पार्टनर्स के साथ स्ट्रक्चर्ड “डायलॉग” की एक प्रक्रिया तैयार की है।

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