राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

क्या जैविक खाद किसानों की मदद कर रही है? जानें नए आंकड़े और योजनाएं

04 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: क्या जैविक खाद किसानों की मदद कर रही है? जानें नए आंकड़े और योजनाएं – खेती को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने के लिए जैविक खाद (बायोफर्टिलाइज़र) का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह न केवल सस्ता विकल्प है बल्कि फसलों की पोषण क्षमता बढ़ाने में भी मददगार है। जैविक खाद को प्राकृतिक खेती और समग्र पोषक तत्व प्रबंधन का अहम हिस्सा माना जाता है।

यह जानकारी कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।

जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं और आर्थिक सहायता

‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) और ‘उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट’ (MOVCDNER) जैसी योजनाओं के तहत जैविक खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। PKVY योजना के तहत किसानों को ऑन-फार्म और ऑफ-फार्म जैविक खाद सहित अन्य जैविक इनपुट के लिए प्रतिवर्ष ₹15,000 प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। MOVCDNER के तहत किसानों को इसी उद्देश्य के लिए ₹32,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाती है।

पिछले पांच वर्षों में, DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से PKVY और MOVCDNER योजनाओं के तहत किसानों के खातों में क्रमशः ₹693.30 करोड़ और ₹236.78 करोड़ डाले गए हैं।

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प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम

गाजियाबाद, नागपुर, बेंगलुरु, इंफाल और भुवनेश्वर में स्थित नेशनल सेंटर ऑफ ऑर्गेनिक एंड नेचुरल फार्मिंग (NCONF) और इसके क्षेत्रीय केंद्र जैविक खेती, जैविक खाद के उत्पादन और उपयोग के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

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इसके साथ ही, जैविक खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इसे फर्टिलाइज़र कंट्रोल ऑर्डर (1985) के तहत अधिसूचित किया गया है। जैविक खाद के गुणवत्ता मानकों को निर्माताओं के लिए अनिवार्य रूप से पालन करना होता है।

ICAR का योगदान और शोध

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने विभिन्न फसलों और मिट्टी के प्रकारों के लिए प्रभावी जैविक खाद विकसित की है, जिससे रासायनिक खाद के उपयोग में कमी लाई जा सके। ICAR के तहत चल रहे ‘ऑल इंडिया नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन सॉयल बायोडायवर्सिटी’ में जैविक खाद के तरल और पाउडर रूप विकसित और प्रोत्साहित किए जा रहे हैं। फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, पोटेशियम और जिंक के लिए उपयुक्त जैविक खाद विकसित की गई है, जिनमें से कई का व्यवसायीकरण हो चुका है।

ICAR किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए जैविक खाद के उपयोग पर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता है।

जैविक खाद, जैविक उर्वरक और जैविक खाद को ICAR और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित खेती के तरीकों का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा, लंबी शेल्फ-लाइफ वाली तरल जैविक खाद तकनीक भी विकसित की गई है, जो विभिन्न फसलों और मिट्टी के प्रकारों के लिए अनुकूलित है।

हालांकि, दूरदराज के इलाकों में किसानों तक इन योजनाओं की पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए इन सुविधाओं को सुलभ बनाना बेहद जरूरी है।

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