भारत का नारियल निर्यात एक साल में 62% तक बढ़ा, मंत्री शिवराज सिंह ने दक्षिणी राज्यों से पुराने बागानों के पुनरुद्धार को कहा
19 सितंबर 2026, नई दिल्ली: भारत का नारियल निर्यात एक साल में 62% तक बढ़ा, मंत्री शिवराज सिंह ने दक्षिणी राज्यों से पुराने बागानों के पुनरुद्धार को कहा – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों के लिए आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि क्षेत्र की चुनौतियों, अवसरों और आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में ठोस सुधार लाना, खाद्य सुरक्षा मजबूत करना, कृषि के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और अर्थव्यवस्था को नई गति देना है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत ‘राष्ट्र प्रथम’ है। केंद्र किसी राज्य में किस राजनीतिक दल की सरकार है, इसके आधार पर कृषि संबंधी मुद्दों को नहीं देखता। केंद्र का ध्यान ऐसे समाधान खोजने पर है, जो किसानों के जीवन में सुधार ला सकें।
मशीनें रोटी बना सकती हैं, गेहूं नहीं उगा सकतीं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें दुनिया को लगातार बदलेंगी, लेकिन कृषि का महत्व हमेशा बना रहेगा। फल, सब्जियां और अनाज खेतों से ही प्राप्त होते हैं और इन्हें पैदा करने वाले किसान हैं। उन्होंने कहा कि मशीन रोटी बना सकती है, लेकिन गेहूं का उत्पादन नहीं कर सकती। इसलिए किसान केवल ‘अन्नदाता’ ही नहीं, बल्कि ‘जीवनदाता’ भी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की सेवा करना उनके लिए ईश्वर की सेवा के समान है। भारतीय कृषि के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं- 140 करोड़ से अधिक आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आजीविका को सुरक्षित और समृद्ध बनाना तथा लोगों को पर्याप्त भोजन के साथ पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराना।
दक्षिण भारत में बागवानी की अपार संभावनाएं
शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिण भारत में बागवानी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मसाले, कॉफी, काजू, कोको, चंदन और अन्य फसलों के क्षेत्र में दक्षिणी राज्यों में काफी संभावनाएं हैं। ये फसलें क्षेत्र की पोषण सुरक्षा मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की जलवायु, मिट्टी, पानी और संसाधनों की स्थिति अलग है। इसलिए पूरे देश के लिए एक जैसी कृषि योजना बनाना उचित नहीं है। इसी वजह से क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन जरूरी हैं, ताकि हर क्षेत्र की जरूरत के अनुसार कृषि का रोडमैप तैयार किया जा सके।
नियम लोगों की सेवा के लिए हों, बोझ बनने के लिए नहीं
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से पुराने कानूनों, अधिनियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नियम लोगों के लिए हैं, लोग नियमों के लिए नहीं। जहां नियमों में बदलाव की जरूरत है, वहां राज्य अपने सुझाव सामने रखें। यदि किसी विषय पर केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत है तो उसे भी सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों के जीवन में दिखाई देना है, केवल फाइलों तक सीमित रहना नहीं। केंद्र और राज्य अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जरूरी सुधार करके लोगों को राहत देने की दिशा में काम करें।
राज्यों की बेहतर पहल को दूसरे राज्य भी अपनाएं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सम्मेलन में कृषि से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रस्तुतियां और चर्चाएं होंगी। इसके बाद किसानों और अन्य हितधारकों से संवाद कर उनके सुझाव भी लिए जाएंगे। विभिन्न राज्यों की बेहतर कृषि पद्धतियों को सामने लाया जाएगा, ताकि सफल पहलों को दूसरे राज्य भी अपना सकें। उन्होंने दक्षिणी राज्यों की कृषि और बागवानी क्षेत्र में उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि आगे भी सुधार की काफी गुंजाइश है। केंद्र सरकार राज्यों को पूरा सहयोग देगी। भूमि और किसान राज्यों के पास हैं, जबकि केंद्र हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा। दोनों के मिलकर काम करने से ही कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाया जा सकता है।
नारियल निर्यात एक साल में 62% बढ़ा
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत का नारियल निर्यात एक साल में 4,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,038 करोड़ रुपये हो गया है, जो 62 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि बजट में नारियल को बढ़ावा देने के लिए नई योजना की घोषणा की गई थी और अब यह क्रियान्वित होने के लिए तैयार है। दक्षिणी राज्य देश में नारियल उत्पादन में अग्रणी हैं, इसलिए उन्हें इस नई पहल का अधिकतम लाभ उठाने के लिए तैयारियां शुरू करनी चाहिए। उन्होंने पुराने नारियल बागानों के पुनरुद्धार की रणनीति बनाने पर भी जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 60-70 वर्ष पुराने नारियल के पेड़ अक्सर कम नारियल पैदा करते हैं और वांछित गुणवत्ता भी नहीं दे पाते। इसलिए राज्यों को चरणबद्ध तरीके से पुराने पेड़ों को नए पौधों से बदलने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने राज्यों से काजू और कोको को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं पहले से तैयार करने का आग्रह किया।
वैश्विक बाजारों में किसानों के लिए नए अवसर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इनसे फलों, सब्जियों और अनाज समेत विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने राज्यों से इन समझौतों का विस्तृत अध्ययन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग वाले कृषि उत्पादों की पहचान करने को कहा। किसानों को ऐसे फल, सब्जियां और अनाज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा करते हों। उन्होंने कृषि मूल्य श्रृंखला में भी वैश्विक मानकों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ मिल सके।
तेलंगाना को पीएमएवाई-जी के तहत मिलेंगे 2 लाख आवास
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि तेलंगाना में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत 2 लाख आवासों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहली किस्त राज्य के मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है। अब इन 2 लाख आवासों का निर्माण शुरू होगा। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के माध्यम से चिन्हित ऐसे लाभार्थी, जिनके आवास अभी भी कच्चे हैं, उन्हें भी आगामी चरणों में योजना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार तेलंगाना को सभी क्षेत्रों में निरंतर सहयोग देती रहेगी।
दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्र सरकार, दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, कृषि विशेषज्ञों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों, प्रगतिशील किसानों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य दक्षिणी राज्यों की क्षेत्र-विशिष्ट कृषि प्राथमिकताओं पर चर्चा करना और टिकाऊ एवं मजबूत कृषि के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को बेहतर बनाना रहा।
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