राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन, मंत्री शिवराज बोले- तय समय में पूरा करें हर कमिटमेंट

19 सितंबर 2026, नई दिल्ली: हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों के कृषि रोडमैप पर मंथन, मंत्री शिवराज बोले- तय समय में पूरा करें हर कमिटमेंट – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों की रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यों से कृषि क्षेत्र में तय लक्ष्यों और कमिटमेंट को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई है, उनमें से एक्शन योग्य बिंदुओं पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। केंद्र और राज्य मिलकर कृषि क्षेत्र की एक टीम हैं, इसलिए सभी को समन्वय के साथ काम करना होगा।

सिर्फ मीटिंग नहीं, परिणाम देना है

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कॉन्फ्रेंस के बाद तय किए गए काम पूरे नहीं हुए तो पूरी कवायद बेकार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल बैठक, चर्चा और खान-पान तक सीमित रहने के बजाय कृषि क्षेत्र में परिणाम देना जरूरी है। राज्यों ने सम्मेलन में जो कमिटमेंट किए हैं, उन्हें तय समयसीमा में पूरा करना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी राज्य ने फार्मर आईडी का काम दिसंबर तक पूरा करने का कमिटमेंट किया है तो उसे दिसंबर तक पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान तय किया गया था कि राज्यों के तय कार्यक्रम के अनुसार भारत सरकार और कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक गांवों और खेतों में जाएंगे। वहां किसान, वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी मिलकर कृषि से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

फार्मर आईडी और एग्री स्टैक पर तेजी के निर्देश

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को फार्मर आईडी और एग्री स्टैक से जुड़े काम तेजी से पूरा करने को कहा। उन्होंने बताया कि तेलंगाना और कर्नाटक में फार्मर आईडी बनाने का काम 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में जियो रिफरेंसिंग का काम भी अच्छा हुआ है। उन्होंने कहा कि अंडमान निकोबार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल ने डिजिटल क्रॉप सर्वे में पूर्णता हासिल की है। वहीं केरल, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में फार्मर आईडी बनाने के काम में अभी और तेजी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र की कई व्यवस्थाएं फार्मर आईडी पर निर्भर रहेंगी, इसलिए कोई राज्य पीछे नहीं रहना चाहिए।

लैंड रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री का हो समन्वय

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन राज्यों में लैंड पार्सल अभी नहीं जुड़े हैं, विशेषकर तमिलनाडु और केरल में, वहां इस काम को तेजी से पूरा करना होगा। केरल में लैंड रिकॉर्ड डेटा का किसान रजिस्ट्री के साथ समन्वय भी जरूरी है। उन्होंने दक्षिणी राज्यों में टेनेंट फार्मर्स यानी बटाईदार और किरायेदार किसानों के लिए एसओपी तैयार कर उसे नोटिफाई करने की जरूरत बताई। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार द्वीप समूह को इस दिशा में काम करना होगा। वहीं गांवों के नक्शों की जियो रिफरेंसिंग का काम पुडुचेरी और लक्षद्वीप को पूरा करना है।

13 क्षेत्रीय भाषाओं में किसानों तक पहुंचेगा भारत विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी भाषा में कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने के लिए भारत विस्तार व्यवस्था को क्षेत्रीय भाषाओं से जोड़ा जाएगा। फिलहाल यह हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, लेकिन इसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम सहित 13 क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू किया जाएगा। किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और उसी भाषा में जवाब प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने राज्यों की योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ने का काम तेजी से पूरा करने को कहा।

लैब से लैंड तक पहुंचे कृषि रिसर्च

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यों की सुविधा के अनुसार 15 या 20 दिन का अभियान तय किया जा सकता है और इस दौरान भारत सरकार के वैज्ञानिक राज्यों में पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि देश में 16 हजार वैज्ञानिक हैं। आईसीएआर संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालय केवल रिसर्च करने के लिए नहीं हैं, बल्कि शोध को किसानों तक पहुंचाने के लिए भी हैं।उन्होंने कहा कि जब तक किसान और वैज्ञानिक साथ बैठकर काम नहीं करेंगे और रिसर्च खेतों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक कृषि क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव संभव नहीं होगा।

28-29 सितंबर को दिल्ली में रबी कॉन्फ्रेंस

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 28 और 29 सितंबर को दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में रबी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें सभी राज्यों के कृषि मंत्री और अधिकारी अपनी टीम के साथ रबी सीजन का पूरा प्लान लेकर आएंगे। कॉन्फ्रेंस में तय किया जाएगा कि रबी सीजन में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में बोई जाएगी। इसके आधार पर बीज की उपलब्धता, उर्वरक की जरूरत और अन्य आवश्यक संसाधनों का आकलन कर आगे की योजना तैयार की जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को कृषि के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर बनाने और देश को दुनिया का फूड बास्केट बनाने के लिए मिलकर काम करना होगा। सम्मेलन में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी के साथ तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के कृषि मंत्री भी शामिल हुए।

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