राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

10 साल बाद पहली बार चीनी आयात करेगा भारत, सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात को दी मंजूरी

21 अगस्त 2026, नई दिल्ली: 10 साल बाद पहली बार चीनी आयात करेगा भारत, सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात को दी मंजूरी – देश में चीनी की घटती उपलब्धता और लगातार बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। करीब 10 साल बाद भारच पहली बार चीनी का आयात करने जा रहा है। सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने और त्योहारों से पहले कीमतों पर दबाव कम करने के  10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत किया जा सकेगा। बता दें, घरेलू मार्केट में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 2 महीनों में कीमतों में करीब 40% तक की बढ़ोतरी हुई है।

त्योहारों से पहले बढ़ाई जाएगी चीनी की सप्लाई

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा, और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के कारण मिठाई, केक और अन्य कन्फेक्शनरी उत्पादों की मांग बढ़ती है। जिसके चलते कई बड़ी बिस्किट और कन्फेक्शनरी कंपनियां भी फेस्टिवल से पहले स्टॉक तैयार करती हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य अतिरिक्त चीनी को घरेलू बाजार में उपलब्ध कराकर आपूर्ति और मांग के बीच बढ़ रहे दबाव को कम करना है।

गन्ने की फसल पर मौसम का असर

चीनी की घरेलू उपलब्धता पर प्रतिकूल मौसम का भी असर पड़ा है। इस साल हुई अनियमित बारिश और सूखे मौसम ने भी गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। इससे चीनी उत्पादन और उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इसी बीच त्योहारों के दौरान खपत बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।

बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी लगाम

सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी सीमा तय की है। 1 सितंबर से 30 नवंबर तक हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी उपयोग करने वाले बड़े उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इससे पहले चीनी कारोबारियों के लिए भी स्टॉक की सीमा तय की गई थी। सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध चीनी को जरूरत के समय उपलब्ध रखना और अनावश्यक स्टॉक जमा होने से रोकना है।

सरकार के इन कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को नियंत्रित करना है। ड्यूटी-फ्री आयात से अतिरिक्त चीनी बाजार में आएगी, जबकि स्टॉक सीमा के जरिए जमाखोरी पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

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