ICAR ने लॉन्च किया ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’: WhatsApp पर 24 घंटे मिलेगी तिलहन फसलों की मुफ्त सलाह
12 जून 2026, नई दिल्ली: ICAR ने लॉन्च किया ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’: WhatsApp पर 24 घंटे मिलेगी तिलहन फसलों की मुफ्त सलाह – देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने किसानों के लिए एक नई डिजिटल पहल शुरू की है। आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑयलसीड्स रिसर्च (IIOR), हैदराबाद द्वारा विकसित WhatsApp आधारित एआई परामर्श सेवा ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ तिलहन किसानों को उनकी अपनी भाषा में वैज्ञानिक और अनुसंधान आधारित सलाह उपलब्ध कराएगी।

इस सेवा का शुभारंभ 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन के दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव तथा ICAR के महानिदेशक द्वारा किया गया। यह पहल खेती-किसानी में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी सीधे पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बिना किसी ऐप के मिलेगी खेती संबंधी सलाह
‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ की खास बात यह है कि किसानों को इसके लिए कोई अलग ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी। किसान केवल व्हाट्सऐप के माध्यम से इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है और सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।
किसान +91 40245 98180 नंबर को अपने मोबाइल में ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ के नाम से सेव कर किसी भी भारतीय भाषा में सवाल पूछ सकते हैं। एआई आधारित चैटबॉट मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन, नाइजर समेत विभिन्न तिलहन फसलों से जुड़े सवालों के जवाब तुरंत उपलब्ध कराएगा।
खेती के हर चरण की जानकारी
यह एआई चैटबॉट किसानों को फसल की किस्मों के चयन, बुवाई, फसल प्रबंधन, सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, कटाई के बाद की प्रक्रियाओं और बीज उपलब्धता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराएगा। किसानों को उनकी फसल और क्षेत्र के अनुसार वैज्ञानिक एवं अनुसंधान आधारित सलाह मिलेगी।
कई ICAR संस्थानों की वैज्ञानिक जानकारी से तैयार
‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ का नॉलेज बेस ICAR के कई प्रमुख संस्थानों की वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है। इसमें आईसीएआर-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंदौर (आईसीएआर-एनएसआरआई), आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ ग्राउंडनट रिसर्च, जूनागढ़ (आईसीएआर-आईआईजीआर), आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ रेपसीड एंड मस्टर्ड रिसर्च, भरतपुर (आईसीएआर-आईआईआरएमआर) और पीसी-यूनिट (तिल और नाइजर) तथा तिल और नाइजर फसलों से संबंधित परियोजना इकाइयों का योगदान शामिल है।
इन संस्थानों द्वारा विकसित वैज्ञानिक ज्ञान को एक बहुभाषी एआई एजेंट के साथ जोड़ा गया है, ताकि देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी मिल सके।
किसानों और वैज्ञानिकों के बीच की दूरी होगी कम
आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑयलसीड्स रिसर्च, हैदराबाद के निदेशक Dr. R. K. Mathur ने कहा कि ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ तिलहन अनुसंधान को सीधे किसानों तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास है। यह सेवा किसानों को उनकी अपनी भाषा में उसी प्लेटफॉर्म पर जानकारी उपलब्ध कराती है, जिसका वे पहले से उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल से लैब और खेत के बीच मौजूद दूरी, भाषा की बाधाएं और सूचना प्राप्त करने की लागत जैसी चुनौतियों को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। खरीफ बुवाई सीजन की शुरुआत के साथ उन्होंने सभी तिलहन किसानों से इस सेवा का लाभ उठाने की अपील भी की।
ऐसे करें ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ का उपयोग
स्टेप 1: अपने मोबाइल में +91 40245 98180 नंबर को ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ के नाम से सेव करें।
स्टेप 2: व्हाट्सऐप खोलकर अपनी पसंदीदा भारतीय भाषा में संदेश भेजें।
स्टेप 3: अपनी तिलहन फसल से जुड़े सवाल पूछें और तुरंत वैज्ञानिक एवं अनुसंधान आधारित सलाह प्राप्त करें।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
देश में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को देखते हुए तिलहन उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में किसानों तक सही समय पर सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। ‘ऑयलसीड्स किसान मित्र’ जैसी डिजिटल पहल किसानों को विशेषज्ञ सलाह तक आसान पहुंच प्रदान करेगी, जिससे उत्पादन बढ़ाने और फसल प्रबंधन में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
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