तीन प्रतिशत से अधिक होगी – कृषि क्षेत्र की विकास दर

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एसोचैम फूड वैल्यू चैन पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस

चित्र में (बायें से) सर्वश्री सागर कौशिक ग्लोबल सीओओ यूपीएल, भारत में यूनिडो प्रतिनिधि रेने वेन बर्केल, डॉ. अशोक दलवई सीईओ नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी, डॉ. रमेशचंद सदस्य नीति आयोग, डॉ. बी.एन. श्रीनिवास मूर्ति उद्यानिकी आयुक्त भारत सरकार एवं श्री दीपक बागला सीईओ इन्वेस्ट इंडिया।

(निमिष गंगराड़े)

नई दिल्ली। कृषि विकास की वृद्धि दर को लेकर लगाई जा रही अटकलों के दौरान यह क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. रमेश चंद्र ने कहा, ‘चालू वित्त वर्ष (2019-20) के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.1 फीसदी पर पंहुच सकती है, जो पिछले साल के 2.9 फीसदी से अधिक होगी।’

डॉ. रमेश चंद एसोचैम द्वारा फ्रूड वैल्यू चैन पार्टनरशिप पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के आयोजन में कृषक जगत मीडिया पार्टनर के रूप में उपस्थित था।

कार्पोरेट सेक्टर की भागीदारी बढ़े

कृषि की मौजूदा स्थिति पर डॉ. रमेशचंद ने कहा कि हाल के वर्षों में इस क्षेत्र की विकास दर दो फीसदी थी, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 2.9 फीसद दर्ज की गई। मौजूदा समय में कृषि क्षेत्र में निजी निवेश और प्रतिस्पर्धा की सख्त जरूरत है, जिससे इसका भला हो सकता है। कृषि क्षेत्र में निजी निवेश की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहा है। इसमें विकास तभी संभव है, जब निजी निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। डॉ. रमेशचंद ने निजी निवेश पर जोर देते हुए कहा, ‘जब तक कृषि में बीज से लेकर बिक्री तक कॉरपोरेट सेक्टर की सहभागिता नहीं बढ़ेगी, तब तक क्रांति और किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन होगा।”

खास मुद्दे

  • मंडी कानून में सुधार
  • कॉन्ट्रेक्ट खेती को बढ़ावा
  • भण्डारण ढांचा मजबूत हो
  • खाद्य प्रसंस्करण को प्राथमिकता

भूमि पट्टेधारी मॉडल के लिए दबाव

नीति आयोग इसके लिए केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह जल्दी से जल्दी भूमि पट्टेधारी का मॉडल कानून राज्यों को अपनाने के लिए तैयार करे। कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए मंडी कानून और कांट्रेक्ट खेती के मॉडल कानून को लागू करना ही होगा। इस दिशा में केंद्र सरकार आगे बढ़ रही है, जिसके लिए राज्यों को आगे आना होगा।

नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी के सीईओ डॉ. अशोक दलवई ने कहा, ”खाद्य अपव्यय से बचने के लिए, अतिरिक्त खाद्य भण्डारण के लिए एक बुनियादी ढांचा बनाने की जरूरत है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के बागवानी आयुक्त डॉ. बी.एन श्रीनिवास मूर्ति ने कहा कि अगर हम सूक्ष्म स्तर के उत्पादों जैसे नारियल, शहद, शराब पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम खाद्य मूल्य श्रृंखला भागीदारी में किसी भी पश्चिमी देश के साथ आसानी से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

भारत में यूएनआईडी के प्रतिनिधि, श्री रेने वान बर्केल ने कहा कि खाद्य मूल्य श्रृंखला साझेदारी में आगे बढऩे के लिए, हमें खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र पर प्रमुखता से ध्यान देने की आवश्यकता है। इंवेस्ट इंडिया के सीईओ श्री दीपक बागला ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे भारत बिना कृषि क्रांति के 5 ट्रिलियन डॉलर के अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पंहुच सके। श्री सागर कौशिक, ग्लोबल सीओओ, यूपीएल ने कहा कि हमारे किसान जो मूल्य पैदा कर रहे हैं, वह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है।

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