हरित ईंधन और महिला-अनुकूल मशीनें-भारत की नई खेती का भविष्य
29 नवंबर 2025, नई दिल्ली: हरित ईंधन और महिला-अनुकूल मशीनें-भारत की नई खेती का भविष्य – भारत की कृषि को 2047 के विजन के अनुरूप आधुनिक, टिकाऊ और श्रम-सहज बनाने के लिए हरित ऊर्जा आधारित मशीनरी और महिला किसानों के लिए जेंडर-फ्रेंडली उपकरण अनिवार्य हैं। यह संदेश केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने EIMA Agrimach India 2025 के उद्घाटन सत्र में दिया। राष्ट्रीय कृषि अखबार कृषक जगत एवं ग्लोबल एग्रीकल्चर मैगज़ीन इस कार्यक्रम के मीडिया पार्टनर थे l
इलेक्ट्रिक और CBG ट्रैक्टर—भारत की भविष्य की खेती
डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि अगले 5–10 वर्षों में कृषि मशीनरी को इलेक्ट्रिक एवं कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) जैसे हरित ईंधनों की ओर तेजी से स्थानांतरित करना होगा।उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और CBG आधारित मशीनरी किसानों की रखरखाव व परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी लाएगी। मंत्रालय भी भविष्य की नीतियों में ऐसी तकनीकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
महिला किसानों के लिए वास्तव में ‘श्रम-कम’ करने वाली मशीनें जरूरी
महिला किसानों को कृषि की “रीढ़” बताते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के बाद उद्योग की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जेंडर बजटिंग का अर्थ केवल स्वामित्व नहीं, बल्कि ऐसे उपकरण उपलब्ध कराना है जो उनका शारीरिक बोझ कम कर सकें—चाहे वे मैनुअल हों या मोटरचालित।
भारत–इटली कृषि सहयोग का नया दौर
भारत में इटली के राजदूत एंटोनियो बार्टोली ने बताया कि कृषि सहयोग बढ़ाने के लिए जल्द ही नई दिल्ली स्थित दूतावास में अग्रि-अताशे नियुक्त करने की दिशा में काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि करीब 20 इतालवी कंपनियां भारत में उत्पादन कर रही हैं तथा इस संख्या को बढ़ाने की योजना है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
कृषि को ‘सेवा’ के रूप में विकसित करने की जरूरत
आयोजन समिति के चेयरमैन एवं TAFE के बोर्ड निदेशक टी. आर. केसवन ने कहा कि सीडर जैसे महंगे उपकरणों का उपयोग किसानों द्वारा केवल कुछ दिनों के लिए किया जाता है, इसलिए कृषि को सेवा-आधारित मॉडल पर ले जाना होगा।ऐसे मॉडल में किसान उपकरणों को किराये पर लेकर उत्पादन लागत घटा सकेंगे।
भारत में मशीनीकरण बाजार दोगुना होने की ओर
फेडेरुनाकोमा की महानिदेशक सिमोना रापास्तेला ने बताया कि भारत का कृषि मशीनीकरण बाजार 2023 में 13.7 बिलियन डॉलर था, जो 2033 तक 31.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय–इतालवी साझेदारी इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगी।
पे-पर-यूज मॉडल से मशीनीकरण में आएगी रफ्तार
कार्यक्रम में FICCI–PwC की संयुक्त रिपोर्ट “Farm Mechanisation: The Path Towards a Future-Ready India” जारी की गई।
PwC के पार्टनर शशि कांत सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत स्वामित्व के बजाय पे-पर-यूज मॉडल अपनाने से देशभर में मशीनीकरण और तेजी से बढ़ सकेगा।
इटैलियन ट्रेड एजेंसी की उप-आयुक्त सबरीना मंगियालावोरी ने बताया कि भारतीय किसान जुताई, बुवाई, सिंचाई, फसल संरक्षण और थ्रेसिंग जैसे आधुनिक समाधानों को तेजी से अपना रहे हैं।Corteva Agriscience के दक्षिण एशिया अध्यक्ष सुब्रत गीड ने कहा कि 2050 तक वैश्विक जनसंख्या 1000 करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें भारत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी। ऐसे में मशीनीकरण ही उत्पादन बढ़ाने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
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