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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

दिल्ली में पहली राज्य ऋण संगोष्ठी, ₹2.62 लाख करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान

14 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: दिल्ली में पहली राज्य ऋण संगोष्ठी, ₹2.62 लाख करोड़ की ऋण क्षमता का अनुमान – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने 13 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए पहली राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी के माध्यम से जिला स्तर पर आधारित ऋण योजना को राज्य स्तर की योजना से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया। इसमें जिलों की संभावित ऋण योजनाओं को राज्य फोकस पत्र 2026–27 में शामिल किया गया।

इस पहल के तहत नाबार्ड ने दिल्ली के सभी जिलों के लिए अधिकारियों को जिला विकास प्रबंधक के रूप में नामित किया है। संगोष्ठी की अध्यक्षता दिल्ली सरकार में मंत्री रविंदर सिंह (इंद्राज) ने की।

कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक चंदन कुमार, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर श्रीनिवास राव, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह सहित दिल्ली सरकार के कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, लघु उद्योग विकास बैंक तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान की महानिदेशक विभा धवन सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों, शोध संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, कारीगरों और किसानों की भी भागीदारी रही।

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कार्यक्रम में नाबार्ड द्वारा समर्थित उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेतक पंजीकरण से जुड़े उत्पादों के स्टॉल लगाए गए। इनका उद्देश्य पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देना और आजीविका के अवसरों को मजबूत करना था।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक नवीन कुमार रॉय ने अपने संबोधन में कहा कि ऋण योजना को जिला स्तर की आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया जा रहा है ताकि संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

राज्य फोकस पत्र 2026–27 के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र के लिए कुल ऋण क्षमता ₹2.62 लाख करोड़ आंकी गई है। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए ₹4284.20 करोड़ की संभावना है, जिसमें फसल ऋण ₹568.64 करोड़, कृषि अवसंरचना ₹230.72 करोड़ और अन्य गतिविधियों के लिए ₹2833.11 करोड़ शामिल हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए ₹2.42 लाख करोड़, आवास के लिए ₹3,82,5.05 करोड़, निर्यात ऋण ₹2,03,7.20 करोड़, नवीकरणीय ऊर्जा ₹867.09 करोड़ और सामाजिक अवसंरचना के लिए ₹5927.92 करोड़ का अनुमान है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में ऋण की मांग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की प्रमुख भूमिका है। साथ ही शहरी कृषि के रूपों जैसे ऊर्ध्व खेती और रसोई बागवानी पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक ने कहा कि यह संगोष्ठी विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय का मंच है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ऋण योजना का केंद्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा सेवा क्षेत्र होना चाहिए। उन्होंने जिला आधारित योजना और वार्षिक ऋण योजना के बीच तालमेल पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि ऋण पहुंच में असमानता, दस्तावेजों की कमी और बिना गारंटी ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयाँ जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए डिजिटल मंचों और तकनीक आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

मंत्री रविंदर सिंह (इंद्राज) ने अपने संबोधन में कहा कि यह संगोष्ठी राज्य की ऋण व्यवस्था और सहकारिता तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, सेवा क्षेत्र और पारंपरिक आजीविका को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने पारंपरिक शिल्प और भौगोलिक संकेतक वाले उत्पादों के प्रचार, विपणन और मंच उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही कौशल विकास, तकनीक और बाजार से जुड़ाव को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान राज्य फोकस पत्र 2026–27 जारी किया गया और जिला स्तर की संभावित ऋण योजनाएँ प्रस्तुत की गईं। इसके साथ ही भौगोलिक संकेतक पंजीकरण, विद्युत वाहन कौशल विकास और वित्तीय साक्षरता से जुड़े कार्यों के लिए स्वीकृति पत्र वितरित किए गए।

इस अवसर पर “कला कुंभ – परंपरा से रोशन प्रगति पथ” नामक डिजिटल सूची और दीपावली हाट पर आधारित पुस्तिका भी जारी की गई, जिसमें कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को शामिल किया गया है।

कार्यक्रम में “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, स्वयं सहायता समूह और युवाओं के माध्यम से समावेशी विकास हेतु ऋण व्यवस्था” विषय पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें अंतिम स्तर तक ऋण पहुंचाने पर चर्चा हुई।

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