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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

रबी फसलों पर किसानों को 11 साल में ₹8.36 लाख करोड़ का MSP भुगतान, अगले सीजन के लिए ₹90,962 करोड़ का अनुमान

31 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: रबी फसलों पर किसानों को 11 साल में ₹8.36 लाख करोड़ का MSP भुगतान, अगले सीजन के लिए ₹90,962 करोड़ का अनुमान – केंद्र सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज़ के मुताबिक पिछले 11 साल यानी 2014-15 से 2025-26 के बीच छह प्रमुख रबी फसलों पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह राशि इससे पहले के 10 साल, यानी 2004-05 से 2013-14 के दौरान हुए 2.65 लाख करोड़ रुपये के भुगतान से करीब तीन गुना ज्यादा है।

गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम इन छह फसलों की सरकारी खरीद भी इस दौरान 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई। अकेले गेहूं की खरीद 2,254 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची, और इसका भुगतान 2.56 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.31 लाख करोड़ रुपये हो गया।

अगले रबी सीजन के लिए बढ़ा हुआ MSP

30 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए सभी छह फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। इसके तहत कुसुम का MSP सबसे ज्यादा 675 रुपये बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि सरसों का MSP 413 रुपये बढ़कर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।

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मसूर का समर्थन मूल्य 390 रुपये बढ़कर 7,390 रुपये, जौ का 136 रुपये बढ़कर 2,286 रुपये और चने का 83 रुपये बढ़कर 5,958 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है, जिसमें किसानों को उत्पादन लागत पर सबसे ज्यादा 106 प्रतिशत का मार्जिन मिलने का अनुमान है।

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दस्तावेज़ के मुताबिक अगले रबी सीजन में अनुमानित 324 लाख मीट्रिक टन उपज की खरीद पर किसानों को करीब 90,962 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। सरसों की खरीद पर किसानों को उत्पादन लागत पर 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत तक मार्जिन मिलने की उम्मीद जताई गई है, जबकि चने पर यह मार्जिन 59 प्रतिशत और जौ पर 58 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

चालू सीजन में भी रिकॉर्ड खरीद

चालू रबी विपणन सीजन 2026-27 में ही अब तक गेहूं की 357.57 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है, जिसकी कीमत 92,432.51 करोड़ रुपये है और इससे 34 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि हर साल सरकारी खरीद का दायरा और उस पर होने वाला खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।

दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि यह MSP वृद्धि 2018-19 के बजट में की गई उस घोषणा के मुताबिक है, जिसमें सरकार ने सभी अधिसूचित फसलों का समर्थन मूल्य उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना रखने की बात कही थी। गेहूं और सरसों जैसी फसलों में यह मार्जिन डेढ़ गुने से भी काफी ज्यादा बताया गया है।

किसान संगठनों का कहना है कि समर्थन मूल्य में हर साल होने वाली बढ़ोतरी से रबी फसलों की बुवाई के फैसले पर असर पड़ता है, क्योंकि किसान बुवाई से पहले ही यह आकलन कर लेते हैं कि किस फसल पर कितना फायदा मिल सकता है। गेहूं और सरसों की बढ़ी हुई दरों को देखते हुए इस साल भी इन दोनों फसलों के रकबे में इज़ाफा होने की संभावना जताई जा रही है।

समर्थन मूल्य की घोषणा हर सीजन शुरू होने से पहले ही कर दी जाती है, ताकि किसान बुवाई का फैसला लेने से पहले ही यह अंदाजा लगा सकें कि किस फसल पर उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सकता है। गेहूं और सरसों की सरकारी खरीद मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर होती है, जहां रबी सीजन में इन्हीं दो फसलों का रकबा सबसे ज्यादा रहता है।

चना और मसूर जैसी दलहन फसलों पर समर्थन मूल्य में हुई बड़ी बढ़ोतरी से किसानों को गेहूं के अलावा दूसरी फसलों की तरफ भी रुख करने का प्रोत्साहन मिलता है। इससे खेतों में फसल चक्र बना रहता है, जिसका मिट्टी की सेहत और आगे की फसल की पैदावार पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

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