केंद्र सरकार ने ‘केज एक्वाकल्चर इन रिजर्वायर : स्लीपिंग जायंट्स’ पर वेबिनार का आयोजन किया

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29 जनवरी 2022, नई दिल्ली ।  केंद्र सरकार ने ‘केज एक्वाकल्चर इन रिजर्वायर : स्लीपिंग जायंट्स’ पर वेबिनार का आयोजन किया – “आजादी का अमृत महोत्सव” के तहत भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग ने केज एक्वाकल्चर इन रिजर्वायर : स्लीपिंग जायंट्स’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत सरकार के मत्स्यपालन सचिव श्री जतिन्द्र नाथ स्वैन ने की l. । इनमें भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के अधिकारी व विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मत्स्यपालन अधिकारी, राज्य कृषि, पशु चिकित्सा व मत्स्यपालन विश्वविद्यालयों के शिक्षक और पूरे देश के जलीय कृषि उद्योग के उद्यमी, वैज्ञानिक, किसान, हैचरी के मालिक, छात्र और हितधारक शामिल हुए ।

केंद्रीय मत्स्यपालन सचिव श्री स्वैन ने अपने उद्घाटन भाषण में मत्स्यपालन क्षेत्र के विकास के लिए जलाशयों और केज एक्वाकल्चर (पिंजड़ा मत्स्यपालन) के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने आगे अच्छा लाभ सुनिश्चित करने के लिए किसानों को संभावित बाजारों सहित जलाशयों में मजबूत पिंजरा पालन प्रणाली (केज कल्चर सिस्टम) को अपनाने की सलाह दी। श्री स्वैन ने इससे संबंधित पूरे विश्व और देश में सफलता की कहानियों के उदाहरणों को रेखांकित किया।

संयुक्त सचिव (अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी) श्री सागर मेहरा ने अपने उद्घाटन भाषण में पिंजरा जैसे घेरे का उपयोग करके मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका को बताया। उन्होंने आगे कहा कि मत्स्यपालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत केज एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने के लिए निवेश के लक्ष्य निर्धारित किए हैं।

वहीं, तकनीकी सत्र के दौरान आईसीएएआर-केंद्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई) के निदेशक डॉ. बी. के. दास ने “‘केज एक्वाकल्चर इन रिजर्वायर : स्लीपिंग जायंट्स” विषयवस्तु पर एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने आगे किसानों व हितधारकों के लिए विभिन्न कौशल और क्षमता विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में केज एक्वाकल्चर के विविधीकरण के लिए आईसीएआर-सीआईएफआरआई विकसित विभिन्न तकनीक, अवसर और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. एस. के. द्विवेदी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ वेबिनार का समापन हुआ।

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