अल नीनो की चुनौती के बीच केंद्र सरकार की बहु-स्तरीय तैयारी, शिवराज सिंह ने बताया पूरा प्लान
27 जून 2026, नई दिल्ली: अल नीनो की चुनौती के बीच केंद्र सरकार की बहु-स्तरीय तैयारी, शिवराज सिंह ने बताया पूरा प्लान – अल नीनो और कमजोर मानसून की संभावित स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), आईसीएआर-सीआरआईडीए (CRIDA) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के विशेषज्ञों के साथ उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है।
कमजोर मानसून की आशंका, खरीफ फसलों पर रहेगा असर
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी देर से आगे बढ़ रहा है और अब तक करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 2 जुलाई तक भी बारिश सामान्य से कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में वर्षा आधारित क्षेत्रों में खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि पहले से वैज्ञानिक योजना और जमीनी स्तर पर तैयारियां कर रही है, ताकि किसानों को कम से कम नुकसान हो।
315 संभावित प्रभावित जिलों की पहचान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कृषि मंत्रालय और आईसीएआर ने वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ऐसे 315 जिलों की पहचान की है, जहां कम बारिश का सबसे अधिक असर पड़ सकता है।
इनमें 111 जिले उच्च प्राथमिकता, 76 जिले मध्यम प्राथमिकता और 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में रखे गए हैं। ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।
उन्होंने कहा कि इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और जिला प्रशासन को स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला कृषि आकस्मिकता योजना होगी लागू
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि आईसीएआर और आईसीएआर-सीआरआईडीए ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan-DACP) तैयार कर ली है।
इन योजनाओं में कम बारिश की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, फसल परिवर्तन, उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग और किसानों की आय सुरक्षित रखने के उपाय शामिल हैं। उन्होंने राज्यों से कहा कि इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि जरूरत पड़ते ही जमीन पर लागू करने की पूरी तैयारी रखें।
जल संरक्षण पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
कमजोर मानसून की आशंका के बीच सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब, जलाशय, खेत-तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नालों और अन्य जल संरचनाओं की तत्काल मरम्मत और मजबूती का काम किया जाए। साथ ही मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के तहत जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि पानी का भंडारण बढ़ सके और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार भी मिले।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पानी की कमी अधिक होगी, वहां पेयजल उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता होगी।
कम पानी वाली फसलों को मिलेगा बढ़ावा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी जाएगी। इसके साथ ही फसल विविधीकरण, मिश्रित खेती और इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने दलहन, तिलहन और मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती पर विशेष जोर देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि यदि सामान्य समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।
बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। संभावित प्रभावित जिलों के लिए अतिरिक्त बीज सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा बुवाई कराई जा सके। उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता संतोषजनक है और उनकी आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने पर जोर
उन्होंने कहा कि देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों तक वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने का काम करेंगे। किसानों को एग्रो-मौसम सलाह, एसएमएस, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया के माध्यम से समय-समय पर जानकारी दी जाएगी, ताकि वे मौसम के अनुसार सही समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन कर सकें।
उन्होंने किसानों से अपील की कि 75 से 100 मिलीमीटर संचयी वर्षा होने और खेत में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करें, ताकि बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत न आए।
पशुधन और चारे की भी होगी व्यवस्था
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो पशुओं के लिए चारे की कमी भी हो सकती है। इसे देखते हुए सरकार ने पहले से चारा भंडारण और जरूरत वाले क्षेत्रों तक आपूर्ति की योजना तैयार कर ली है। साथ ही चारे की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए भी निगरानी बढ़ाई जाएगी।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर भी फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार केवल फसल बचाने पर ही नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।
उन्होंने बताया कि संभावित प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का दायरा बढ़ाने, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तेजी से जारी करने और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
हर स्तर पर होगी निगरानी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र, राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर बहु-स्तरीय समन्वय व्यवस्था बनाई गई है।
दिल्ली में ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ का गठन किया गया है, जो मानसून, फसलों की स्थिति, बीज-उर्वरक की उपलब्धता और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे। राज्यों को भी अपने स्तर पर कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों से बोले- घबराने की जरूरत नहीं
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि कमजोर मानसून की आशंका जरूर है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तैयारी के साथ काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सलाह, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता तथा सरकारी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से इस चुनौती का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से देश की कृषि, पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा जाएगा तथा किसानों की आजीविका पर किसी बड़े संकट का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
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