देश में 3.5 करोड़ हेक्टेयर में फैल चुका है गाजर घास

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फूल आने से पहले उखाडकर नष्ट करें

देश में 3.5 करोड़ हेक्टेयर में फैल चुका है गाजर घास – कृषि विज्ञान केन्द्र रायसेन के वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रमुख, डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि गाजर घास पूरे भारत वर्ष में लगभग 35 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुका है एवं गाजर घास मुख्यतः शहरों में खुले स्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों, सड़क के किनारे, नालियों एवं पड़ती भूमि के साथ-साथ खेत खलियानों में भी फैलना शुरू हो गया है। गाजर घास से मनुष्यों में त्वचा संबंधी रोग, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा जैसी बीमारियों हो जाती है एवं पषुओं के लिये भी यह खरतपवार विषाक्त होता है। कृषि विज्ञान केन्द्र, द्वारा 16 से 22 अगस्त, तक गाजर घास उन्मूलन सप्ताह मनाया गया।

श्री दुबे ने बताया गाजर घास के नियंत्रण के लिए वर्षा ऋतु में गाजर घास के पौधों को फूल आने से पहले उखाडकर नष्ट करें। प्रतिस्पर्धा वनस्पतियों जैसे चकोड़ा व जंगली चौलाई के बीज को गाजर घास वाले स्थान पर मार्च-अप्रैल के माह में छिड़काव करें। गाजर घास पर खरपतवारनाषक रसायन ग्लायॅफोसेट 1 प्रतिषत या मेट्राब्यूजिन 0.30 प्रतिशत का घोल बनाकर छिड़काव करें व खरपतवारनाषक एलाक्लोर, एट्राजिन, 2, 4 डी का भी उपयोग किया जा सकता है। गाजर घास को उखाड़कर व काटकर कम्पोस्ट बनाने के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गाजर घास के नियंत्रण हेतु मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाइकोलोराटा) का उपयोग करके भी खत्म किया जा सकता है। यह मैक्सिकन बीटल खरपतवार अनुसंधान निदेषालय, जबलपुर से प्राप्त किया जा सकता है।

इस जागरूकता सप्ताह में दिन प्रतिदिन ग्राम-सकतपुर, सोनकच्छ, चन्दौरा व कुरावत में विभिन्न गतिविधियों कृषक गोष्ठी, सामूहिक चर्चा, प्रषिक्षण कार्यक्रम द्वारा कृषकों, बच्चों व नवयुवकों को गाजर घास से फसलों में होने वाले नुकसान, पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्परिणाम, मनुष्यों व पशुओं में होने वाली बीमारियों एवं गाजर घास का एकीकृत प्रबंधन आदि विषयों पर कृषि विज्ञान केन्द्र के अन्य वैज्ञानिक श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी, श्री रंजीत सिंह राघव, डॉ. मुकुल कुमार, श्री आलोक सूर्यवंषी, डॉ. अंषुमान गुप्ता, श्री सुनील कैथवास द्वारा जानकारी दी गयी।

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