एग्रोकेम फेडरेशन ने सरकार के कदम पर उठाए सवाल

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ट्राईसाक्लाजोल-बूप्रोफेजिन पर प्रस्तावित प्रतिबंध

नई दिल्ली। हाल ही में केंद्र सरकार ने ट्राईसाइक्लाजेल और बूप्रोफेजिन पर मनमाने ढंग से प्रस्तावित प्रतिबंध लगाया है, जो देश की एग्रोकेमिकल्स इंडस्ट्री के हितों पर कुठाराघात है। सरकार का यह अतिरेकी और अभूतपूर्व कदम देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि को प्रभावित करेगा। ये दोनों कीटनाशक धान के झुलसा और भूराफदका (राईस ब्लास्ट और ब्राउन प्लांट हॉपर) के नियंत्रण में प्रभावी है।

सरकार का यह निर्णय बिना किसी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है, इसलिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस प्रस्तावित प्रतिबंध पर रोष प्रकट करते हुए एग्रोकेम फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट श्री एन.के. अग्रवाल ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के नियम निर्धारक अभी भी ट्राईसाक्लाजोल के सुरक्षा मानक का परीक्षण कर रहे हैं। इसलिए भारत में सरकार द्वारा इसके प्रस्तावित प्रतिबंध का फैसला करना, अनेक प्रश्रों को जन्म देता है। श्री अग्रवाल ने अपने पत्र मेंं कहा कि कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग, गलत प्रयोग पर नियंत्रण एवं उचित रेसिड्यू मॉनीटरिंग सिस्टम की स्थापना के बजाय कीमती फंगीसाईड मालिक्यूल पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। श्री अग्रवाल ने मांग की है कि इस प्रकार के प्रस्तावित प्रतिबंध लगाने के पूर्व सरकार को कृषि रसायन उद्योग को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर देना चाहिए। साथ ही आपने प्रस्तावित प्रतिबंध को हटाने की भी जोरदार तरीके से बात रखी हैं।

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