राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

जापान के बाद नेपाल में भी भारतीय आमों पर उठे सवाल, फाइटोसैनिटरी मानकों पर बढ़ी निगरानी

लेखक: सचिन बोन्द्रिया

15 जून 2026, इंदौरजापान के बाद नेपाल में भी भारतीय आमों पर उठे सवाल, फाइटोसैनिटरी मानकों पर बढ़ी निगरानी – भारतीय आमों के निर्यात को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। कुछ सप्ताह पहले जापान द्वारा भारतीय आमों के आयात को 2026 सीजन के लिए निलंबित किए जाने के बाद अब नेपाल में भी भारतीय आमों के आयात को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि नेपाल ने भारतीय आमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों का खंडन किया है, लेकिन दोनों घटनाक्रमों ने भारतीय कृषि निर्यात में फाइटोसैनिटरी मानकों के पालन की आवश्यकता को केंद्र में ला दिया है।

जापान ने हाल ही में भारत से ताजे आमों के आयात को निलंबित कर दिया था। जापानी अधिकारियों द्वारा भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्रों के निरीक्षण के दौरान कीट नियंत्रण एवं उपचार प्रक्रियाओं में कमियां पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। इसके चलते अल्फांसो, केसर, लंगड़ा, बंगनपल्ली और अन्य प्रमुख भारतीय आम किस्मों का जापान निर्यात प्रभावित हुआ। यह लगभग 20 वर्षों बाद पहली बार है जब जापान ने भारतीय आमों के आयात पर ऐसी कार्रवाई की है।

जापान के बाद नेपाल में भी भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि भारतीय आमों में कीटनाशक अवशेष और क्वारंटीन संबंधी चिंताओं के कारण नेपाल ने आयात रोक दिया है। इन खबरों से सीमा पार फल व्यापार में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।

हालांकि नेपाल के प्लांट क्वारंटीन एंड पेस्टिसाइड मैनेजमेंट सेंटर (PQPMC) ने बाद में स्पष्ट किया कि भारतीय आमों पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। नेपाल ने कहा कि आयात जारी है, लेकिन इसके लिए फाइटोसैनिटरी प्रमाणपत्र, कीट-मुक्तता संबंधी आवश्यकताओं तथा हॉट वॉटर ट्रीटमेंट जैसे निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।

भारत सरकार ने भी नेपाल द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों को भ्रामक बताया है। सरकार के अनुसार नेपाल भारतीय आमों के लिए आयात परमिट और रिलीज ऑर्डर जारी कर रहा है तथा निर्यात प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी है।जापान और नेपाल से जुड़े हालिया घटनाक्रम भारतीय कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए चेतावनी हैं। वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए किसानों, पैकहाउस संचालकों, उपचार केंद्रों और निर्यातकों को गुणवत्ता नियंत्रण, कीटनाशक अवशेष प्रबंधन तथा अंतरराष्ट्रीय फाइटोसैनिटरी मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।

क्या है फाइटोसैनिटरी प्रमाणपत्र? –  फाइटोसैनिटरी (Phytosanitary) प्रमाणपत्र एक आधिकारिक दस्तावेज है, जिसे पौध संरक्षण प्राधिकरण जारी करता है। यह प्रमाणित करता है कि निर्यात किए जा रहे फल, सब्जियां, बीज या अन्य कृषि उत्पाद  हानिकारक कीट एवं रोगों से मुक्त हैं।आयातक देश के पौध-स्वास्थ्य नियमों का पालन करते हैं। आवश्यक निरीक्षण एवं उपचार प्रक्रियाओं से गुजरे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षित पाए गए हैं। आम सहित अन्य कृषि जिंसों के निर्यात में यह प्रमाणपत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक माना जाता है।

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