असम के युवा किसान ने धान के बाद खाली जमीन पर उगाई तोरिया, कमाए ₹30 हजार प्रति हेक्टेयर
08 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: असम के युवा किसान ने धान के बाद खाली जमीन पर उगाई तोरिया, कमाए ₹30 हजार प्रति हेक्टेयर – असम के लखीमपुर जिले के मोहुरा चापोरी गांव के युवा किसान कृपानाथ प्रेमे ने खेती में नया कमाल कर दिखाया है। उन्होंने धान की कटाई के बाद खाली पड़ी जमीन को अतिरिक्त कमाई का जरिया बना दिया। किसान कृपानाथ ने धान की फसल लेने के बाद 1 हेक्टेयर में तोरिया की खेती की। इससे उन्हें 8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त हुई। जिसे बेचकर उनको ₹29,863 प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त आय हासिल हुई।
धान के बाद खाली रहती थी जमीन
कृपानाथ प्रेमे के परिवार के पास 1.5 हेक्टेयर जमीन है। यहां खरीफ सीजन में साली धान की खेती की जाती थी। धान की कटाई के बाद रबी सीजन में जमीन खाली पड़ी रहती थी। परिवार को इस बात की जानकारी नहीं थी कि धान की कटाई के बाद इस जमीन पर दूसरी फसल भी ली जा सकती है।
कृपानाथ प्रेमे पोस्टग्रेजुएट हैं। उन्होंने बाहर नौकरी तलाशने के बजाय गांव में रहकर अपने पिता के साथ खेती करने का फैसला किया। परिवार की आय मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर थी, लेकिन इससे उनकी आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थीं। ऐसे में उन्होंने धान की कटाई के बाद रबी फसल लेने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), लखीमपुर से सलाह ली।
KVK ने किसानों को तोरिया-सरसों की खेती के लिए किया जागरूक
कृपानाथ की पहल के बाद KVK लखीमपुर के वैज्ञानिकों की टीम ने गांव का दौरा किया। टीम ने वहां उपलब्ध धान के बाद खाली रहने वाली जमीन का सर्वे किया और किसानों को धान के बाद राई और सरसों की खेती की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। रबी 2025-26 में ‘धान के बाद खाली क्षेत्रों में राई-सरसों को बढ़ावा देने’ के कार्यक्रम के तहत KVK लखीमपुर ने कृपानाथ प्रेमे की 1 हेक्टेयर धान के बाद खाली जमीन पर देर से बोई जाने वाली तोरिया की किस्म TS-38 की खेती का प्रदर्शन कराया।
नवंबर के चौथे सप्ताह में की बुवाई
साली धान की कटाई के तुरंत बाद नवंबर के चौथे सप्ताह में कृपानाथ ने TS-38 की बुवाई की। KVK की ओर से बताए गए उत्पादन तरीके के अनुसार उन्होंने 10 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई की। इसके साथ प्रति हेक्टेयर 87 किलोग्राम यूरिया, 220 किलोग्राम SSP, 25 किलोग्राम MOP और 10 किलोग्राम बोरेक्स का इस्तेमाल किया गया।
8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिली उपज
धान के बाद खाली पड़ी जमीन में लगाई गई तोरिया की फसल का प्रदर्शन अच्छा रहा। कृपानाथ ने 8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज हासिल की, जो इस कार्यक्रम में शामिल किसानों में सबसे अधिक रही। इससे उन्हें ₹29,863 प्रति हेक्टेयर की शुद्ध आय मिली। फसल का लाभ-लागत अनुपात (B:C Ratio) 2.24 रहा। इससे साबित हुआ कि लखीमपुर में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का इस्तेमाल तोरिया और सरसों जैसी फसलों के लिए किया जा सकता है। इससे बिना अतिरिक्त जमीन लिए खेती की तीव्रता बढ़ाने और किसानों की आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी का रास्ता खुलता है।
अब बड़े क्षेत्र में करेंगे तोरिया की खेती
फसल के अच्छे परिणाम से उत्साहित कृपानाथ प्रेमे अगले सीजन में साली धान की कटाई के बाद बड़े क्षेत्र में TS-38 तोरिया की खेती करने की योजना बना रहे हैं। उनकी खेती को देखकर आसपास के किसान भी इस किस्म और धान की कटाई के बाद रबी फसल लेने में रुचि दिखा रहे हैं। कई किसान अब अपनी खाली पड़ी जमीन को रबी सीजन में खेती के लिए इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं।
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