प्राकृतिक खेती से 80 फीसदी छोटे किसानों को लाभ होगा : श्री मोदी

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प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय सम्मेलन

23 दिसंबर 2021, नई दिल्ली । प्राकृतिक खेती से 80 फीसदी छोटे किसानों को लाभ होगा : श्री मोदी – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्राकृतिक खेती विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन में किसानों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जिन्हें सबसे अधिक फायदा होगा, वो हैं देश के 80 प्रतिशत किसान। वो छोटे किसान, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। इनमें से अधिकांश किसानों का काफी खर्च, केमिकल फर्टिलाइजर पर होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर वो प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ेंगे तो उनकी स्थिति और बेहतर होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैं आज देश के हर राज्य से, हर राज्य सरकार से, ये आग्रह करूंगा कि वो प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए आगे आएं। इस अमृत महोत्सव में हर पंचायत का कम से कम एक गांव जरूर प्राकृतिक खेती से जुड़े, ये प्रयास हम कर सकते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, गुजरात के राज्यपाल, गुजरात और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब आजादी के 100वें वर्ष तक का जो हमारा सफर है, वो नई आवश्यकताओं, नई चुनौतियों के अनुसार अपनी खेती को ढालने का है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 6-7 साल में बीज से लेकर बाजार तक, किसान की आय को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं। मिट्टी की जांच से लेकर सैकड़ों नए बीज तक, पीएम किसान सम्मान निधि से लेकर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी तक, सिंचाई के सशक्त नेटवर्क से लेकर किसान रेल तक, अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने इस आयोजन से जुड़े सभी किसानों को बधाई दी।

हरित क्रांति में रसायनों और उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा ये सही है कि केमिकल और फर्टिलाइजर ने हरित क्रांति में अहम रोल निभाया है। लेकिन ये भी उतना ही सच है कि हमें इसके विकल्पों पर भी साथ ही साथ काम करते रहना होगा। उन्होंने कीटनाशकों और आयातित उर्वरकों के खतरों के प्रति आगाह किया, जिससे इनपुट की लागत बढ़ जाती है और स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘कृषि से जुड़े हमारे इस प्राचीन ज्ञान को हमें न सिर्फ फिर से सीखने की ज़रूरत है, बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब से तराशने की भी जरूरत है।
गुजरात सरकार ने प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें आईसीएआर के केंद्रीय संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एटीएमए (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी) नेटवर्क के माध्यम से जुड़े किसानों के अलावा 5000 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि इस संगोष्ठी का आयोजन प्राकृतिक खेती के प्रयोग को बढ़ावा देने और इससे होने वाले लाभों की किसानों को ठीक ढंग से जानकारी देने के लिए किया गया है। श्री शाह ने कहा पूरे देश में किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएँ इसलिए उन्होंने ही इस मुहिम को गति देने का निश्चय भी किया है और एक अपील भी की है और इसी का परिणाम है कि देश भर में लाखों किसान आज धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। इसके लाभों को देखकर अनेकानेक किसान इसके प्रयोग को आगे बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय यह प्रयास कर रहा है कि देशभर के अंदर हम इस प्रकार की लैबोरेट्री का एक जाल बुने जो देश की भूमि का परीक्षण, भूमि में रसायनिक खाद का सर्टिफिकेशन और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का सर्टिफिकेशन भी करेगी, जिससे किसान को ज्यादा भाव मिल सकेगा। उन्होने कहा कि अमूल और कुछ अन्य सहकारी संगठन हमारे इस विचार को आगे बढ़ाने में लगे हैं ।

जमीन और मानव सेहत के लिए प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी : श्री पटेल

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की खेती की उर्वरता को बचाने और किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया है तथा उसे पूरा करने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री मोदी ने प्राकृतिक खेती के इस सेमीनार के माध्यम से देश के किसानों को जागरूक किया है। श्री पटेल ने कृषि उपज मंडी सीहोर में यह बात कही। वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधन वाले कार्यक्रम में शामिल हुए।

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