राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं, 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल करेंगे- मंत्री शिवराज सिंह

14 मार्च 2026, नई दिल्ली: 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं, 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल करेंगे- मंत्री शिवराज सिंह – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा है कि देश में महिला सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं और आने वाले समय में 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि करीब 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं।

नई दिल्ली में आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (GCWAS-2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत की परंपरा में बहनों और बेटियों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यहां धरती को भी ‘माता’ कहा जाता है और उसी भावना से उसकी वंदना की जाती है।

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

मंत्री ने कहा कि आज देश में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों में महिलाओं की संख्या लगभग 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कृषि शिक्षा और अनुसंधान में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश के अन्न भंडार भरने में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। खेती के लगभग हर चरण—बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन—में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा विस्तार

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। सरकार ने 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है और अब 3 करोड़ अतिरिक्त महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने बताया कि यह लक्ष्य पूरा होने के बाद देश में कुल 6 करोड़ लखपति दीदी होंगी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

‘ड्रोन दीदी’ और ‘बैंक दीदी’ बन रही महिलाएं

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज महिलाएं सिर्फ पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ड्रोन दीदी, बैंक दीदी और उद्यमी बनकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज करा रही हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि “नारी नारायणी हैं। उनके बिना न खेती का काम चलेगा और न ही देश का विकास संभव है।”

राष्ट्रपति ने किया सम्मेलन का उद्घाटन

इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़ी लगभग सभी गतिविधियों—जैसे बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और बाजार तक फसलों को पहुंचाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

राष्ट्रपति ने बताया कि राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिभाशाली छात्राओं को कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व देने के लिए प्रोत्साहित करना सभी हितधारकों की जिम्मेदारी है।

अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है, जिसका उद्देश्य कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में लैंगिक असमानताओं को कम करना और महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ाना है।

तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन

यह तीन दिवसीय सम्मेलन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (TAAS), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), CGIAR और PPV&FRA के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य टिकाऊ और समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना और नीतिगत ढांचे पर विचार-विमर्श करना है।

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