एग्रीस्टैक से जुड़ चुके 10.31 करोड़ किसान, अब AI से होगा फसल उपज का सटीक आकलन
11 अगस्त 2026, नई दिल्ली: एग्रीस्टैक से जुड़ चुके 10.31 करोड़ किसान, अब AI से होगा फसल उपज का सटीक आकलन – देश में कृषि सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में एग्रीस्टैक के तहत किसान रजिस्ट्रेशन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। एग्रीस्टैक को किसानों को कृषि सेवाओं और सरकारी योजनाओं का तेज, आसान और पारदर्शी लाभ पहुंचाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया गया है।
मंत्री के अनुसार, एग्रीस्टैक के तहत किसान का एक व्यापक डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाता है, जिसमें किसान की जानकारी, भूमि रिकॉर्ड, उगाई जाने वाली फसलें तथा पशुधन और मत्स्य पालन जैसी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। इसका उद्देश्य किसान-केंद्रित सेवाओं और योजनाओं की डिलीवरी को अधिक प्रभावी बनाना है।
एग्रीस्टैक में तीन प्रमुख डिजिटल रजिस्टर
एग्रीस्टैक के तहत कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन मूलभूत रजिस्टर शामिल हैं। इनमें किसान रजिस्टर, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल का रजिस्टर शामिल हैं। इन रजिस्टरों का निर्माण और रखरखाव संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। एग्रीस्टैक के तहत तैयार किसान रजिस्टर को कृषि सेवाओं के लिए एक आधारभूत डेटाबेस के तौर पर विकसित किया गया है। इसे विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं, सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इससे कृषि ऋण वितरण, फसल बीमा, मौसम संबंधी सलाह और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित फसल खरीद जैसी सेवाओं को तेज और आसान बनाने में मदद मिलेगी।
भूमि रिकॉर्ड से जुड़कर बन रही किसान आईडी
किसानों की जानकारी को उनके डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के साथ सिंक्रनाइज करके किसान आईडी बनाई जा रही है। 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी तैयार हो चुकी हैं।वहीं, रबी 2025-26 के दौरान देश के 648 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) किया गया। इस सर्वे के तहत 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर किया गया। मणिपुर ने भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और राज्य किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया में भाग ले रहा है।
राज्यों के पास रहेगा किसान डेटा का स्वामित्व
सरकार ने बताया कि किसान रजिस्ट्री का निर्माण संघीय व्यवस्था के तहत किया गया है। इसका मतलब है कि किसान रजिस्ट्री में मौजूद डेटा का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों के पास रहता है। किसानों के व्यक्तिगत और कृषि संबंधी डेटा की सुरक्षा के लिए एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया गया है।
इसके तहत किसानों की जानकारी उनकी सहमति के आधार पर ही एकत्र की जाती है। किसानों को यह नियंत्रण भी दिया गया है कि उनका डेटा किन अधिकृत संस्थाओं के साथ और किस उद्देश्य से साझा किया जा सकता है।
एग्रीस्टैक में डेटा एन्क्रिप्शन की व्यवस्था
सरकार के अनुसार, एग्रीस्टैक की सुरक्षा व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुरूप है। किसानों की जानकारी को एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखा जाता है, ताकि उसे केवल अधिकृत सिस्टम ही पढ़ सकें। इससे किसानों के संवेदनशील कृषि और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
AI और मशीन लर्निंग से होगा फसल उपज का आकलन
सरकार अब फसल उपज के आकलन में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। फसल बीमा योजना की YES-TECH पहल के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए तकनीक आधारित उपज आकलन लागू किया जा रहा है। इस पहल के तहत फसल उपज के आकलन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) को प्रमुख तकनीकी दृष्टिकोण के रूप में अपनाया गया है। इसका उद्देश्य फसल उत्पादन और उपज का अधिक सटीक तथा तकनीक आधारित आकलन करना है।
डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम भी तैयार
फसल उपज के अनुमान को और सटीक बनाने के लिए डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम (DGCES) नाम की डिजिटल पहल भी विकसित की गई है। यह प्रणाली फसल उत्पादन के अनुमानों के लिए समय पर और सटीक फसल उपज संबंधी डेटा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
इस तरह एग्रीस्टैक के जरिए जहां किसानों की डिजिटल पहचान और भूमि से जुड़ी जानकारी को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है, वहीं डिजिटल फसल सर्वे, AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से फसल उत्पादन के आकलन को भी अधिक तकनीक आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है I
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