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इंदौर। बीज के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती कम्पनी जालना स्थित कलश सीड्स प्रा. लि. के बीज अपनी विश्वसनीयता एवं गुणवत्ता के कारण किसानों के बीच विशेष स्थान बना रही है। उन्नत किस्म की मिर्च लगाने वाले किसानों के मध्य कलश की मिर्च प्रसिद्ध है।
कलश ने अलग-अलग क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग किस्म की मिर्च किस्में तैयार की हैं। यह जानकारी देते हुए कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री सचिन मिश्रा ने कृषक जगत को बताया कि मिर्च की झंकार बीएसएस 267 किस्म सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह हरे व लाल दोनों मिर्च के लिए सर्वाधिक उपयुक्त किस्म है। पकने पर मिर्च का रंग गहरा लाल होता है। यह किस्म रोगों के प्रति सहनशील है और इसके पौधे 4-5 फीट तक ऊंचे होते हैं। मिर्च की लम्बाई 6-7 सेमी तक होती है। इसकी त्वचा पतली होती है इस कारण यह किस्म लाल मिर्च के लिये सर्वाधिक पंसद की जाती है। इसके साथ ही सुपर अर्जुन, जलवा, बीएसएस 813, गणेश, बीएसएस 1005, दिशा आदि संकर मिर्च किस्में अपने-अपने सेगमेंट में लोकप्रिय हैं।
श्री मिश्रा ने बताया कि कलश के बीटी कपास गजब की भी किसानों में मांग बनी हुई है। उन्होंने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक बीटी कपास बीज उपलब्ध कराने की योजना है।
खरपतवार प्रबंधन
मिर्च की फसल को खरपतवारों से मुक्त रखें। मिर्च में पहली निंदाई 20-25 दिन बाद दूसरी निंदाई 35-40 दिन बाद करें। फूल आने की अवस्था में निराई-गुड़ाई कम से कम करें, इससे फूल एवं फल गिरते हैं। सिंचाई के दो-तीन दिन बाद निराई-गुड़ाई करना चाहिए, इससे मृदा में नमी अधिक दिनों तक बनी रहती है। खरपतवारों की अधिक सघनता, लगातार वर्षा एवं मजदूरों की कमी होने की स्थिति में रासायनिक विधि से खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है। इसके लिए फ्लू क्लोरालिन 1 लीटर सक्रिय तत्व या पेन्डीमिथालीन 1 लीटर सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के पूर्व 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने पर खरपतवारों की रोकथाम हो जाती है।

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