डेटा संरक्षण नहीं होने से कृषि रसायन नवाचार में भारत पीछे: क्रॉपलाइफ इंडिया
25 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: डेटा संरक्षण नहीं होने से कृषि रसायन नवाचार में भारत पीछे: क्रॉपलाइफ इंडिया – क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार भारत नए कृषि रसायन तकनीकों तक पहुंच से वंचित है, क्योंकि देश में अभी तक नियामक डेटा संरक्षण व्यवस्था नहीं है। उद्योग संगठन का कहना है कि इस नीतिगत कमी के कारण नवाचार की गति धीमी हुई है और किसान दशकों पुराने कृषि रसायनों पर निर्भर बने हुए हैं।
एक संवाद कार्यक्रम में क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल तथा क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि भारत में बड़े स्तर पर नए कृषि रसायन नवाचार नहीं आ रहे हैं, क्योंकि यहां डेटा संरक्षण के प्रावधान नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग पिछले कुछ वर्षों से ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहा है।
अग्रवाल ने कहा कि डेटा संरक्षण से उत्पाद प्रबंधन व्यवस्था भी मजबूत होगी, क्योंकि इससे कंपनियां किसान प्रशिक्षण, सुरक्षित उपयोग पद्धतियों और उत्पाद के पूरे जीवनचक्र प्रबंधन में अधिक भरोसे के साथ निवेश कर सकेंगी।
किसान अब भी पुराने रसायनों पर निर्भर
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि भारत में वर्तमान में पंजीकृत 338 कृषि रसायनों में से कई तीन से चार दशक पहले लाए गए थे। ऐसे समय में जब कीट प्रतिरोध बढ़ रहा है, कीटों का व्यवहार बदल रहा है और जलवायु दबाव बढ़ रहे हैं, किसान अब भी पुराने रसायनों पर निर्भर हैं।
संगठन ने बताया कि चीन कीटनाशक पंजीकरण के बाद छह वर्ष का डेटा संरक्षण देता है, जबकि यूरोपीय संघ, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका 10 वर्ष का संरक्षण प्रदान करते हैं। भारत में इसके समान कोई वैधानिक व्यवस्था नहीं है।
क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार किसी नए अणु को बाजार में लाने के लिए सुरक्षा, प्रभावशीलता, अवशेष और पर्यावरण संबंधी आंकड़ों पर बड़ा निवेश करना पड़ता है। यदि इस डेटा को संरक्षण नहीं मिलता, तो नवाचार करने वाली कंपनियों के लिए लागत वसूलना कठिन हो जाता है, जिससे भारत में नई तकनीकों को जल्दी लाने का प्रोत्साहन घटता है। संगठन ने नए अणुओं और नए उपयोगों के लिए प्रथम पंजीकरण से लगभग पांच वर्ष की सीमित और समयबद्ध नियामक डेटा संरक्षण व्यवस्था की सिफारिश की है।
अग्रवाल ने कहा कि भारतीय कृषि से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह आधुनिक कीट चुनौतियों और निर्यात मानकों का सामना केवल पुराने रसायनों के सहारे करे। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कीटनाशी प्रबंधन विधेयक 2025 में वैज्ञानिक और समयबद्ध व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि नए और सुरक्षित फसल सुरक्षा उत्पाद तेजी से किसानों तक पहुंच सकें।
निर्यात और किसान सुरक्षा पर असर
क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा कि पुराने कृषि रसायन पर निर्भरता से प्रतिरोध तेजी से बढ़ सकता है, छिड़काव की मात्रा बढ़ सकती है और निर्यात बाजारों में कड़े अवशेष मानकों का पालन कठिन हो सकता है। संगठन ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि यूरोप और ब्रिटेन को होने वाले लगभग 4 करोड़ किलोग्राम प्रीमियम चाय निर्यात पर सख्त अवशेष मानकों का असर पड़ सकता है।
संगठन का कहना है कि नए और अधिक लक्षित फसल सुरक्षा साधनों तक पहुंच भारतीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ निर्यात प्रतिस्पर्धा भी मजबूत करेगी।
कीटनाशी प्रबंधन विधेयक 2025 का समर्थन
प्रारूप कीटनाशी प्रबंधन विधेयक 2025 पर अग्रवाल ने कहा कि कीटनाशी नियमन को आधुनिक बनाने की सरकार की पहल समयानुकूल है। उन्होंने डिजिटलीकरण तथा नकली और मिलावटी उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधानों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि नकली कीटनाशकों पर कड़े दंड अपेक्षाओं के अनुरूप हैं और इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं सक्षम हैं, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार और उद्योग के बीच करीबी समन्वय जरूरी होगा।
क्रॉपलाइफ इंडिया ने यह भी कहा कि मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं, जिनमें योग्य निजी प्रयोगशालाएं भी शामिल हैं, को हितों के टकराव से सुरक्षा उपायों के साथ मान्यता मिलती रहनी चाहिए। संगठन ने केंद्रीय सरकार द्वारा नामित एजेंसियों से समय-समय पर तृतीय पक्ष ऑडिट कराने की सिफारिश की है।
अन्य सिफारिशें
क्रॉपलाइफ इंडिया ने ऑनलाइन कीटनाशक बिक्री के लिए स्पष्ट नियमों की मांग की है। इसमें लाइसेंसधारी विक्रेताओं का सत्यापन, वैध प्रिंसिपल प्रमाणपत्र, उत्पाद ट्रैकिंग, क्षेत्रीय अनुपालन, डिजिटल लेनदेन रिकॉर्ड और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही शामिल है। संगठन ने विधेयक में ई-कॉमर्स पर अलग अध्याय जोड़ने का सुझाव दिया है।
संगठन ने सिफारिश की कि जिम्मेदारी उसी नामित व्यक्ति पर हो जो किसी विशेष इकाई, गोदाम या शाखा का संचालन देखता हो, न कि उन निदेशकों पर जिनकी प्रत्यक्ष संचालन भूमिका नहीं है। साथ ही, छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों और जानबूझकर किए गए उल्लंघनों में अंतर करने वाली दंड व्यवस्था तथा सुधार का अवसर देने की भी मांग की गई है।
आपातकालीन प्रतिबंध प्रावधानों पर संगठन ने कहा कि प्रारूप विधेयक में किसी कीटनाशक पर एक वर्ष तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जिसे 180 दिन और बढ़ाया जा सकता है, तथा अंतिम निर्णय तक प्रतिबंध जारी रह सकता है। संगठन ने चेतावनी दी कि इससे बिना वैज्ञानिक निष्कर्ष के अस्थायी कार्रवाई लंबे प्रतिबंध में बदल सकती है। क्रॉपलाइफ इंडिया ने इस अवधि को 60 से 120 दिन तक सीमित करने और उसके बाद अनिवार्य वैज्ञानिक समीक्षा का सुझाव दिया है।
संगठन ने यह भी कहा कि कीटनाशकों की समीक्षा, उन पर प्रतिबंध या रोक लगाने के फ़ैसले, एक व्यवस्थित वैज्ञानिक मूल्यांकन, विशेषज्ञों की राय और तय समय-सीमा पर आधारित होने चाहिए; इसमें मॉलिक्यूल-स्तर के फ़ैसलों के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा भी शामिल होनी चाहिए।
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