कोर्टेवा एग्रीसाइंस महिला किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है

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एफपीओ इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम

22 अप्रैल 2021, नई दिल्ली । कोर्टेवा एग्रीसाइंस महिला किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है  – वैश्विक कृषि कंपनी कोर्टेवा एग्रीसाइंस  मध्यप्रदेश और बिहार सहित पूरे भारत में कई राज्यों में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का एक इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी मप्र के जिलों में सात एफपीओ का सहयोग करके विशेष रूप से महिलाओं के लिए कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें कृषि विधियों का प्रशिक्षण, मल्टी-ब्रांड एग्री इनपुट्स की उपलब्धता, बाजार से संपर्क बनाने के लिए फसल सलाहकार और एंड-टू-एंड वैल्यू चैन शामिल है।

कोर्टेवा एग्रीसाइंस दक्षिण एशिया के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ अरुणा राचकोंडा ने कहा, “जेंडर के आधार पर काम के विभाजन के कारण संसाधनों और उत्पादक संपत्तियों के प्रभावी और औपचारिक स्वामित्वका अभाव आमतौर पर महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों के दायरे में समान स्थान प्राप्त करने से पीछे रखता है। इन महिलाओं पर केंद्रित एफपीओ के माध्यम से, कोर्टेवा आर्थिक और सामाजिक रूप से उन्हें सशक्त बनाने के साथ-साथ अपने स्वयं के व्यवसाय को चलाने वाले उद्यमियों के रूप में महिला किसानों को मुख्य धारा की खेती में एकीकृत करने की दिशा में काम कर रही है।”

कोर्टेवा मध्यप्रदेश के होशेंगाबाद के भौरा और परसवाड़ा क्षेत्रों में महिलाउद्यमियों के लिए कृषि उद्यमिता और नेतृत्व प्रशिक्षण देकर एफपीओ की मदद कर रहा है। एफपीओ के व्यवसाय को और मजबूत करने के लिए, कंपनी कृषि के  लिए आवश्यक संसाधनों के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है।कोर्टेवा की टीम ने सस्टेनेबल कृषि के तरीकों को अपनाने के लिए महिला किसानों को धान और मक्का की फसल उगाने के लिए कई प्रकार के मशीनरी प्रशिक्षण और अन्य सर्वोत्तम तरीके सिखाने की व्यवस्था भी की।

बाजार में किसान उपस्थिति को बेहतर बनाने और उन्हें उपलब्ध संसाधनों तक पहुंचने में सक्षम बनाकर उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य दिलाने के लिए चिरायु वीमेन फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड (CWCPCL), भौरा ईस के लिए एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज द्वारा प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘ईयर ऑफ़ द ईपीओ 2019-20’  कोर्टेवा के प्रयासों का प्रमाण है।एफपीओ ने सब्जियों और मक्का के उत्पादन और विपणन के लिए 200 महिला शेयर धारकों के साथ अपने काम की शुरुआत की। वर्तमान में, यह मक्का, चना और गेहूं के उत्पादन और विपणन के लिए 1000 महिला शेयर धारकों को सेवा प्रदान करता है। उद्यम 2000 एकड़ से अधिक में मक्का के उत्पादन में मदद कर रहा है और विभिन्न उद्योगों को  प्रति वर्ष 700 टन से अधिक मक्का बेचकर लगभग 2 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करता है, जिससे एफपीओ सदस्यों को एक एकड़ भूमि से 15000 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलता है।

ग्रामीण आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से, कोर्टेवा पूरे भारत में ग्रामीण कृषि-उद्यमियों के समूहों की मदद कर रहा है। इन एफपीओ ने सामूहिक मूल्य वृद्धि की ताकत हासिल कर ली है, जिससे किसानों को पर्याप्त संख्या में अवसर मुहैया कराने में मदद मिल रही है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, इन क्षेत्रों में किसानों के पास गुणवत्तापूर्ण इनपुट, प्रौद्योगिकी, ऋण और अपनी फसल को बेचने के लिए बेहतर संपर्क है।इन प्रयासों के कारण, औसत उपज उत्पादकता में भी 40% की वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप इन किसानों के लिए आय में वृद्धि हुई।

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