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भारत की कपास खेती में चुनौतियाँ और नवाचार की सुनहरी किरण

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24 जून 2024, नई दिल्ली: भारत की कपास खेती में चुनौतियाँ और नवाचार की सुनहरी किरण – हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के बावजूद भारत में कपास की खेती देश के कृषि और औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ बनी हुई है । क्यू एंड क्यू रिसर्च इनसाइट्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कपास एक महत्वपूर्ण फाइबर और नकदी फसल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो लाखों लोगों की आजीविका का आधार है।

भारत में कपास की खेती 60 लाख किसानों द्वारा की जाती  है, जबकि इसके व्यापार और प्रसंस्करण क्षेत्रों में 4-5 करोड़  लोग कार्यरत हैं। वैश्विक कपास उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 23% है, जो विश्व स्तर पर इसकी महत्वपूर्णता को दर्शाता है।

कीटनाशक के उपयोग में कमी

कपास उद्योग को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिनमें प्रमुख है गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का चक्रीय संक्रमण। 2021 और 2023 में गंभीर संक्रमण देखने को मिला, जिससे कुल उपज में 10-15% की कमी आई। किसानों ने गुलाबी सुंडी से निपटने के लिए 2022 में कीटनाशकों के शुरुआती चरण में बढ़े हुए उपयोग जैसे विभिन्न उपाय अपनाए, जिससे संक्रमण अस्थायी रूप से कम हो गया। हालांकि, 2023 में कीटनाशक उपयोग में गिरावट के कारण फसल वृद्धि के बाद के चरणों में गुलाबी सुंडी का प्रभाव बढ़ गया।

सफेद मक्खी भी एक लगातार चुनौती बनी हुई है, जिसके नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ लगभग 1000-1500 रुपये का खर्च होता है। कीटनाशकों के  उपयोग में भी  परिवर्तन आया  है, जिसमें नए रसायन जैसे पायरोप्रोक्सीफेन, थियामेथोक्सम, और डाइफेंथियूरॉन का उपयोग बढ़ रहा है, जबकि अन्य की प्रभावशीलता घट रही है।

फंगीसाइड्स खर्च में भी लगातार वृद्धि देखी गई है l 2019 से 2023 के बीच यह वृद्धि 10% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) रही । प्रमुख फफूंदनाशक ब्रांड जैसे सैफ, कॉनटाफ, अमिस्टार टॉप, कस्टोडिया, और एंट्राकोल का व्यापक उपयोग हो रहा है, औसतन प्रति किसान 0.8 एप्लीकेशन की दर  देखी गई ।

कपास की खेती का आर्थिक परिदृश्य महत्वपूर्ण रूप से विकसित हुआ है लेकिन  पिछले पांच वर्षों में 5.8% CAGR के साथ खेती की लागत में भी वृद्धि हुई है। इन चुनौतियों के बावजूद, 2021 और 2022 में अनुकूल बाजार स्थितियों के कारण कपास एक लाभकारी व्यवसाय बना हुआ है  और पिछले आधे दशक में इसकी औसत लाभप्रदता 60% रही है ।

कीमतें गिरी , बिक्री घटी

हालांकि, खरीफ 2023 ने कपास किसानों के लिए एक अधिक निराशाजनक बाजार वातावरण प्रस्तुत किया, जिसमें औसत बिक्री दरें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से लगभग 8-10% कम थीं। यह गिरावट मुख्य रूप से प्रतिकूल मौसम की स्थितियों के कारण फसल की गुणवत्ता और बाजार में कम बिक्री के कारण थी।

इन समस्याओं के बावजूद , कपास किसान प्रभावशाली रूप से नई तकनीकी अपना रहे हैं . 2019 में स्मार्टफोन की पहुंच 42% से बढ़कर 2023 तक 80% हो गई है। पंजाब और गुजरात जैसे राज्य स्मार्टफोन उपयोग  में अग्रणी हैं, जिससे पेटीएम, भीम, और गूगल पे जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों का उपयोग 15% से बढ़कर 42% हो गया है।

भारत में कपास की खेती को कीट प्रबंधन और आर्थिक उतार-चढ़ाव सहित कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद , यह उद्योग लचीला और अनुकूलनीय बना हुआ है। फसल सुरक्षा रणनीतियों और तकनीकी एकीकरण में निरंतर नवाचार इस उद्योग की विकास दर को वैश्विक परिवर्तनों के बीच बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।

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