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कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

8,000 करोड़ का अवैध जैव-कीटनाशक बाजार: ऑनलाइन बिक्री पर CCFI ने जताई चिंता

25 मार्च 2026, नई दिल्ली: 8,000 करोड़ का अवैध जैव-कीटनाशक बाजार: ऑनलाइन बिक्री पर CCFI ने जताई चिंता – क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI) ने देश में बिना पंजीकृत जैव-कीटनाशकों के तेजी से बढ़ते प्रसार, रासायनिक कीटनाशकों के साथ कथित मिलावट, और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उनकी बिक्री में हो रही वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। 

ये चिंताएं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि विभाग के संयुक्त सचिव (प्लांट प्रोटेक्शन) के साथ हुई बैठक में प्रस्तुत की गईं। फेडरेशन ने किसानों की सुरक्षा, उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और फसल संरक्षण प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए तत्काल नियामक हस्तक्षेप की मांग की। फेडरेशन के अनुसार, देश में अवैध जैव-कीटनाशकों का यह बाजार लगभग 8,000 करोड़ रुपये का है।

उद्योग का प्रतिनिधित्व करते हुए CCFI के विधिक विशेषज्ञ एस. गणेशन ने कहा कि जैव-कीटनाशक क्षेत्र, जो सतत कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, वर्तमान में बिना पर्याप्त नियंत्रण के तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह अनियंत्रित विस्तार न केवल बाजार संतुलन को बिगाड़ रहा है बल्कि स्वदेशी एग्रोकेमिकल उद्योग पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

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कुछ “जैव-कीटनाशक” उत्पादों के दावों पर संदेह

बैठक के दौरान CCFI ने “टर्मिनेटर-11” नामक एक उत्पाद का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसे जैव-कीटनाशक के रूप में बाजार में बेचा जा रहा है। फेडरेशन के अनुसार, इस उत्पाद में घोषित सक्रिय तत्व के रूप में केवल 0.9 प्रतिशत लौंग का तेल (लगभग 9 ग्राम प्रति लीटर) बताया गया है, फिर भी इसे लगभग ₹4,907 प्रति लीटर की ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि शुद्ध लौंग का तेल बाजार में इससे काफी कम कीमत पर उपलब्ध है।

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उत्पाद के उपयोग की अनुशंसित मात्रा ने भी संदेह उत्पन्न किया। लेबल के अनुसार, मात्र 4 ग्राम प्रति एकड़ या 200 लीटर पानी में 400 मिलीलीटर घोलकर इसका उपयोग करने से हेलिकोवर्पा (Heliothis), स्पोडोप्टेरा, एफिड्स और व्हाइटफ्लाई जैसे प्रमुख कीटों को नियंत्रित करने का दावा किया गया है। CCFI ने इन दावों की वैज्ञानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी कम मात्रा में प्रभावशीलता के समर्थन में कोई विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

फेडरेशन ने यह भी आशंका जताई कि ऐसे उत्पादों में छुपे हुए रासायनिक कीटनाशक हो सकते हैं और “बायो” लेबल का उपयोग किसानों के विश्वास का दुरुपयोग करने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही, ऑनलाइन वीडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से आक्रामक प्रचार ने बिना पर्याप्त जांच के इन उत्पादों को व्यापक स्वीकृति दिलाई है।

बाजार संरचना में उभरती असंतुलन की स्थिति

CCFI की प्रस्तुति में भारत के फसल संरक्षण बाजार की वर्तमान संरचना को भी दर्शाया गया। अनुमान के अनुसार, पंजीकृत रासायनिक कीटनाशकों का बाजार लगभग ₹45,000 करोड़ का है, जो कुल बाजार का लगभग 84 प्रतिशत है। वहीं, पंजीकृत जैव-कीटनाशकों का हिस्सा लगभग ₹1,000 करोड़ (2 प्रतिशत) है, जबकि बिना पंजीकृत और अवैध जैव-कीटनाशकों का अनुमानित आकार ₹8,000 करोड़ (15 प्रतिशत) है।

भारत का फसल संरक्षण बाजार (अनुमान 2025)

खंडबाजार आकार (₹ करोड़)हिस्सेदारी (%)
पंजीकृत रासायनिक कीटनाशक45,00084%
पंजीकृत जैव-कीटनाशक1,0002%
अपंजीकृत / अवैध जैव-कीटनाशक8,00015%
कुल बाजार54,000100%

कीटनाशक अधिनियम 1968 और नियम 1971 के तहत, किसी भी कीटनाशक का निर्माण, आयात, बिक्री या वितरण बिना केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति से अनुमोदन के प्रतिबंधित है। पंजीकरण यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद मानव, पशु और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं।

इसके बावजूद, CCFI ने बताया कि बिना पंजीकृत जैव-कीटनाशक पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी व्यापक रूप से उपलब्ध हैं। फेडरेशन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या वर्तमान नियमों के तहत आवश्यक निरीक्षण और प्रवर्तन पर्याप्त रूप से लागू किए जा रहे हैं।

निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की सीमित हिस्सेदारी

CCFI के वरिष्ठ सलाहकार हरीश मेहता ने निम्न गुणवत्ता वाले कीटनाशकों के संदर्भ में डेटा प्रस्तुत किया। पिछले पांच वर्षों में लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मानक से नीचे पाए गए नमूनों का प्रतिशत 1.17 प्रतिशत से 2.7 प्रतिशत के बीच रहा है।

इसके अतिरिक्त, 28 कृषि प्रधान राज्यों से आठ वर्षों की आरटीआई जानकारी के अनुसार लगभग 2.45 प्रतिशत नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

अवधिपरीक्षण हेतु नमूनेमानक से नीचे नमूनेप्रतिशत
2017-186140913452.19%
2018-195972913532.26%
2019-206412316192.52%
2020-216646715732.36%
2021-223954211732.96%
2022-234525112012.65%
2023-244019310072.50%
2024-254176610022.39%
कुल418480102732.45%

फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि “नकली” (spurious) शब्द कीटनाशक अधिनियम में परिभाषित नहीं है। साथ ही, भारतीय एग्रोकेमिकल उत्पाद वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं, जिसका प्रमाण 167 देशों को निर्यात किए गए उत्पादों की स्वीकृति है।

सख्त प्रवर्तन और बाजार अनुशासन की आवश्यकता

CCFI ने सिफारिश की कि पूरे मूल्य श्रृंखला में अधिक मजबूत और समन्वित प्रवर्तन व्यवस्था लागू की जाए। इसमें उत्पादन इकाइयों का कड़ा निरीक्षण, पंजीकरण प्रक्रिया में सख्ती और वितरकों व विक्रेताओं के लाइसेंस की बेहतर निगरानी शामिल है।

फेडरेशन ने छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग, बंदरगाहों पर नियमित जांच, और अत्यंत कम कीमत पर तकनीकी ग्रेड कीटनाशकों की पुनः बिक्री पर नियंत्रण जैसे उपायों पर भी जोर दिया। विशेष रूप से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की निगरानी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया, क्योंकि ये अवैध उत्पादों की बिक्री का प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं।

फेडरेशन ने किसानों से भी अपील की कि वे जीएसटी विवरण सहित उचित बिल प्राप्त करें, ताकि उत्पाद से संबंधित समस्याओं की स्थिति में शिकायत दर्ज कराई जा सके।

सरकार का आश्वासन: ई-कॉमर्स और PMB 2025 पर फोकस

सरकार ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए आश्वासन दिया कि कीटनाशकों की बिक्री में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की भूमिका की गहन जांच की जाएगी। साथ ही, प्रस्तावित पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल (PMB) 2025 के तहत नियामक खामियों को दूर करने और जानबूझकर तथा अनजाने में हुए उल्लंघनों के बीच अंतर करने के प्रावधान शामिल किए जाएंगे।

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