कुम्हड़ा, करेला, ककड़ी पर यूरिया कब डालें

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के डॉ. बी.एस. किरार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एवं डॉ. आर. के. जायसवाल द्वारा कद्दूवर्गीय सब्जियों के उत्पादन के लिये कृषकों को समसामयिकी सलाह दी गई। कद्दूवर्गीय सब्जियों के अंतर्गत खीरा, ककड़ी, लौकी, तोरई, कुम्हड़ा, करेला, टिण्डा, तरबूज एवं खरबूज आदि फसलों की निंदाई-गुड़ाई करके यूरिया 20 कि.ग्रा. प्रति एकड़ का छिड़काव करें।
सब्जियों में सिंचाई हमेशा शाम के समय करें। सब्जियों में प्रमुख कीट फल मक्खी की मादा कीट कोमल फलों में छेद करके छिलके के भीतर अण्डे देते है अण्डों से इल्लियां निकलती हैं तथा फलों के गूदों को खाती हैं जिससे फल सडऩे लगते हैं। क्षतिग्रस्त फल टेढ़े-मेड़े हो जाते हैं तथा फल कमजोर होकर नीचे गिर जाते हैं। इसके नियंत्रण हेतु क्षतिग्रस्त तथा नीचे गिरे हुए फलों को नष्ट कर देना चाहिए। कीटनाशक के घोल में मीठा, सुगंधित चिपचिपा पदार्थ मिलाना चाहिए। इसके लिए ट्रायजोफॉस 40 प्रतिशत ई.सी. मिली. प्रति एकड़ एवं 500 ग्राम शोरा या गुड़ को 250 ली. पानी में घोलकर छिड़काव करें। खेत में प्रपंची फसल के रूप में मक्का या सनई की फसल लगायें।
दूसरा कीट कद्दू का फल भृंग की प्रौढ़ कीट पत्तियों, फूलों एवं फलों में छेद करके खाते हैं। शुरू की अवस्था में कीट पत्तियों को पूर्ण रूप से खा ली जाती हैं। पौधा कमजोर पड़कर सूख जाते हैं इस कीट की इल्लियां मिट्टी के अन्दर घुसकर पौधों की जड़ों तथा भूमिगत तनों को हानि पहुंचाती है इल्लियां मिट्टी को छूते हुए फलों को भी खाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए जब पौधे 4-6 पत्तियों के हो जायें तो पैराथियान 2 प्रतिशत, कार्बोरिल 5 प्रतिशत 8 कि.ग्रा. प्रति एकड़ भुरकाव करें। प्रौढ़ कीटों की संख्या अधिक होने पर डायक्लोरवास 76 ई.सी. 120 मि.ली. प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
चूर्णिल आसिता (भभूतिया) रोग से पत्तियों पर सफेद पावडर सा फैला हुआ दिखाई देता है। रोग पत्तियों की दोनों तरफ सफेद पावडर सा फैला हुआ दिखाई देता है रोग पत्तियों को दोनों तरफ चूर्ण जैसी आवरण से ढंक लेता है। इस रोग से फल छोटे व उचित आकार के नहीं बनते हैं। पौधों के आसपास नमी होना तथा 26-28 से.ग्रे. तापक्रम रोग के लिए उपयुक्त होता है। इस रोग के प्रबंधन हेतु फसल को खरपतवार रहित रखें और कद्दूवर्गीय फसलों के अवशेषों का नष्ट कर देवें और कवकनाशी दवायें सल्फेक्स 3 ग्राम प्रति ली. पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। इन्हीं सब्जियों में मृदुमरोमिल असिता (डाउनी मिल्डयू) रोग से पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले रंग के कोणीय धब्बे बनते हैं तथा रोगी पौधे बौने हो जाते हैं फलस्वरूप उपज कम मिलती है। इसके प्रबंधन हेतु फसल से नींदा अलग कर देवें तथा रोगग्रसित बेल को नष्ट कर देना चाहिए। इसके बाद रोग न रूकने पर डायथेन एम-45 (3 ग्राम) या ट्राईकॉप-50 (4 ग्राम) प्रति ली. पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें।
मोजेक रोग भी कद्दूवर्गीय सब्जियों में आता है। यह वीषाणु (वायरस) से फैलता है इस रोग का प्रकोप शुरू की अवस्था में अधिक हानि पहुंचाता है। ग्रसित पौधे तुरन्त पीले पड़कर मर जाते हैं। इसके प्रबंधन हेतु जिस नींदा पर इसका वायरस पनपता है। उसे खेत से निकालकर मिट्टी में दबा देना चाहिए। इसके लिए दवा ऑक्सीडिमेटान मिथाईल 25 प्रतिशत ई.सी. मात्रा 400 मिली. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल मात्रा 80-100 मिली. प्रति एकड़ 200 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

19 − 16 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।